Garud Puran – गरुड़ पुराण क्यों पढ़ना चाहिए और कब पढ़ना चाहिए?

गरुड़ पुराण भगवान विष्णु जी से संबंधित है

Monika Agarwal
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Monika Agarwal - Freelance Writer
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Garud Puran -गरुड़ पुराण भगवान विष्णु जी से संबंधित है। इसमें भगवान विष्णु के द्वारा अपने भक्तों को दिए गए ज्ञान का वर्णन है। गरुड़ पुराण का पाठ तब किया जाता है जब घर में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और इसका पाठ करने से मृत व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और घर में भी शांति बनी रहती है। गरुड़ पुराण में मौत के बाद व्यक्ति के साथ क्या होता है और बुरे कर्मों की क्या क्या सजा मिलती है इन बातों का वर्णन किया गया है। आइए जानते हैं की इस पुराण का पाठ कब और क्यों करना चाहिए।

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कब और क्यों करना चाहिए गरुड़ पुराण का पाठ?

शास्त्रों के अनुसार इस पुराण (Garud Puran )का पाठ व्यक्ति की मृत्यु के बाद ही करना चाहिए। जिस इंसान की मृत्यु हो जाती है उसकी आत्मा को इसे सुनाया जाता है। ऐसा माना जाता है की मृत व्यक्ति की आत्मा 13 दिनों तक अपने घर पर ही रहती है। इस समय के दौरान आत्म को गरुड़ पुराण सुनाया जाता है। इस का पाठ करने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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गरुड़ पुराण से जुड़ी कुछ बातें (Garud Puran)

इस (Garud Puran ) पुराण का पाठ मृत्यु के बाद किया जाता है इसलिए गरुड़ पुराण को कभी भी घर में नहीं रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है की आप को पूरी तरह से पवित्र हो कर और शुद्ध मन से इस पाठ को करना चाहिए। आप को घर की सबसे साफ सफाई वाली जगह पर ही पाठ करना चाहिए।

गरुड़ पुराण का पाठ करने से क्या क्या फायदे मिलते हैं?

गरुड़ पुराण का पाठ करने से मृत व्यक्ति की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। साथ में घर में सभी प्रकार की नकारात्मक शक्ति खत्म हो जाती है। इसके अलावा आप के घर का वातावरण भी पूरी तरह से शुद्ध हो जाता है। इसका पाठ करने से व्यक्ति को ज्ञान, सदाचार, यज्ञ और तप आदि के बारे में ज्ञान प्राप्त होता है।

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