Bigg Boss 20: रियलिटी शो के घर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक मामूली से गाने ने युद्ध का रूप ले लिया। आम्रपाली दुबे का अरिश्फा खान के सामने ‘छोटा भीम’ गुनगुनाना अरिश्फा को इस कदर चुभ गया कि उन्होंने सीधे तौर पर आम्रपाली और यंग डीएसए को ‘बुली गैंग’ करार दे दिया। अरिश्फा का आरोप था कि ये लोग हमेशा झुंड में आकर हमला करते हैं, जबकि यंग ने इसे अपना पसंदीदा गाना बताकर बचाव किया। मामला इतना बढ़ा कि आम्रपाली ने अरिश्फा पर हर बात में खुद को पीड़ित दिखाने और सुबह-सुबह नकारात्मकता फैलाने का तंज कस दिया। इस हाई वोल्टेज ड्रामे ने घर के समीकरणों को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है।
क्या टूट गया मैरी कॉम का हौसला?
घर के भीतर सिर्फ झगड़े ही नहीं बल्कि भावनाओं का सैलाब भी देखने को मिला। दिग्गज मुक्केबाज मैरी कॉम अपनी जिंदगी के पुराने संघर्षों को याद कर ईशा के सामने फूट-फूटकर रोने लगीं। उन्होंने साझा किया कि एक समय उनकी जिंदगी में इतनी उथल-पुथल थी कि उन्होंने सब कुछ छोड़कर भाग जाने का मन बना लिया था। हालांकि, आम्रपाली दुबे ने उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि अगर वह खुद को कमजोर कर लेंगी तो घर की व्यवस्था कैसे चलेगी। इसी भावुक माहौल में रीति तिवारी ने भी अपने दिल के जख्म कुरेदे और बताया कि कैसे ढाई साल के एक रिश्ते यानी सिचुएशनशिप में उनका दिल बुरी तरह टूटा था।
खाने की मेज पर क्यों छिड़ी बगावत?
रसोई की राजनीति ने कैप्टन गुल्लू की रातों की नींद उड़ा दी है। आम्रपाली दुबे, लव और मैरी कॉम ने कैप्टन गुल्लू पर पक्षपात का इल्जाम लगाते हुए खाना बनाने से साफ मना कर दिया। इन सदस्यों का मानना है कि गुल्लू निष्पक्ष नहीं हैं और अरिश्फा की गलतियों पर चुप्पी साधे रहते हैं। माहौल को बिगड़ता देख माही विज ने भी सख्त लहजा अपनाया और कहा कि खाना बनाने वालों को सम्मान मिलना चाहिए। इस बीच अंडों के बंटवारे को लेकर भी तीखी बहस हुई, जिस पर माही ने तंज कसा कि लोगों को कम से कम खाने जैसी बुनियादी चीज पर राजनीति करने से बाज आना चाहिए। अंत में अरिश्फा ने खुद अपना खाना बनाने का फैसला लेकर इस विवाद को शांत करने की कोशिश की।
कैप्टंसी की रेस में किसने मारी बाजी?
तनावपूर्ण माहौल के बीच बिग बॉस ने मनोरंजन का तड़का लगाते हुए यंग डीएसए को एक रैप टास्क दिया, जो सीधे तौर पर कैप्टंसी की दावेदारी से जुड़ा था। पूरे घर को दो हिस्सों में बांटा गया और इस मुकाबले की कमान संचालक के तौर पर कुशाल तंवर को सौंपी गई। काजी तौकीर और यंग डीएसए की टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। दोनों टीमों के सदस्यों ने एक-दूसरे को पछाड़ने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया और जमकर बहसबाजी भी हुई। लेकिन अंत में बाजी यंग डीएसए की टीम के हाथ लगी, जिन्होंने शानदार तालमेल दिखाते हुए जीत हासिल की और कैप्टंसी की दौड़ में खुद को सबसे आगे खड़ा कर लिया।
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