Deepika Padukone Depression: दीपिका पादुकोण ने जब दोस्त को खोने के बाद बदली दुनिया, प्रकाश पादुकोण ने खोला राज

Deepika Padukone Depression: दीपिका पादुकोण ने कैसे डिप्रेशन को मात देकर बदली लाखों की जिंदगी, पिता प्रकाश पादुकोण ने साझा किए इमोशनल पल।

Rupali kumawat
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Rupali kumawat - Sub Editor
3 Min Read

Deepika Padukone Depression: दीपिका पादुकोण की जिंदगी का सबसे बड़ा बदलाव तब नहीं आया जब उन्होंने अपनी बीमारी का खुलासा किया, बल्कि तब आया जब उन्होंने आत्महत्या की वजह से अपने एक बेहद करीबी दोस्त को खो दिया। उस झकझोर देने वाले हादसे ने ही दीपिका को यह अहसास कराया कि सिर्फ अपनी कहानी सुनाना काफी नहीं है, बल्कि दूसरों की जान बचाने के लिए जमीन पर उतरकर काम करना होगा। बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस होने के बावजूद साल 2015 में जब दीपिका ने अपने मानसिक तनाव और डिप्रेशन की बात दुनिया के सामने रखी, तो वह महज एक बयान नहीं बल्कि एक बड़ी क्रांति की शुरुआत थी। इस मुश्किल घड़ी में उनके पिता प्रकाश पादुकोण और मां उज्जला पादुकोण उनके सबसे बड़े पिलर बनकर खड़े रहे, जिनका मानना था कि अगर दीपिका के सच बोलने से किसी एक की भी जान बचती है, तो इसे छिपाने का कोई मतलब नहीं है।

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क्यों एक हादसे ने बदल दी दीपिका की पूरी सोच?

दीपिका पादुकोण के लिए डिप्रेशन से लड़ना सिर्फ एक व्यक्तिगत जंग नहीं थी। जब उन्होंने अपने दोस्त को खोया, तो उनके भीतर एक ऐसी तड़प जागी जिसने ‘द लिव लव लाफ फाउंडेशन’ को जन्म दिया। इस संस्था का मकसद बहुत साफ था कि जिस तरह लोग बुखार होने पर डॉक्टर के पास जाते हैं, वैसे ही मानसिक परेशानी होने पर भी बिना डरे विशेषज्ञों की मदद लें। दीपिका ने समाज की उस पुरानी सोच पर चोट की जहां मानसिक स्वास्थ्य को कमजोरी या शर्म का विषय माना जाता था। प्रकाश पादुकोण कहते हैं कि परिवार के अटूट भरोसे ने ही दीपिका को इतना निडर बनाया कि वह सामाजिक दबाव की परवाह किए बिना अपनी कमजोरी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना सकीं।

क्या पिछले दस सालों में बदल गया है भारत का नजरिया?

पिछले लगभग एक दशक यानी करीब दस वर्षों में भारत में मेंटल हेल्थ को लेकर एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव महसूस किया गया है। दीपिका पादुकोण जैसी बड़ी हस्ती के आगे आने से अब युवा पीढ़ी अवसाद और चिंता जैसे गंभीर विषयों पर खुलकर बात करने लगी है। आज स्कूलों से लेकर दफ्तरों तक में मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा होना सामान्य बात हो गई है। दीपिका आज भी फिल्मों में अपनी सक्रियता के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस अभियान को आगे बढ़ा रही हैं। उनकी इस कोशिश ने यह साबित कर दिया है कि पर्दे की चमक-धमक से दूर असल जिंदगी की लड़ाइयां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं और उन्हें जीतना भी मुमकिन है।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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