Homemade Cooler: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा अविष्कार छाया हुआ है जिसे देखकर बड़े-बड़े इंजीनियर भी सोच में पड़ गए हैं। भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां लोग महंगे AC और कूलर खरीदने के लिए अपनी जेब ढीली कर रहे हैं, वहीं एक नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम ने पूरी महफिल लूट ली है। इस देसी जुगाड़ की सबसे खास बात यह है कि यह कम बजट में आपको वो ठंडक दे सकता है जिसके लिए लोग हजारों रुपये खर्च कर देते हैं। इंटरनेट पर वायरल हो रहे इस तरीके ने यह साबित कर दिया है कि अगर दिमाग लगाया जाए तो कबाड़ से भी कमाल की चीज बनाई जा सकती है। लोग इस इनोवेशन को देखकर दंग हैं और अब हर कोई घर पर ही अपना निजी एयर कूलर तैयार करने की जुगत में लगा हुआ है।
क्या वाकई नीले ड्रम से मुमकिन है पहाड़ों जैसी ठंडक?
Homemade Cooler: को बनाने की प्रक्रिया जितनी रोमांचक है, उससे कहीं ज्यादा इसका परिणाम चौंकाने वाला है। इसे तैयार करने के लिए आपको किसी बहुत बड़ी वर्कशॉप की जरूरत नहीं है बल्कि घर में मौजूद कुछ बेसिक सामान से ही काम चल जाएगा। सबसे पहले एक बड़ा नीला ड्रम लिया जाता है जिसकी क्षमता 50 लीटर से लेकर 1000 लीटर तक हो सकती है। इस ड्रम के किनारों को कटर की मदद से इस तरह काटा जाता है कि वह पारंपरिक कूलर की जाली जैसा दिखने लगे। इसके बाद इसमें कूलिंग पैड या खस लगाई जाती है। हवा के लिए एक एग्जॉस्ट फैन या टेबल फैन को ड्रम के एक हिस्से में गोल काटकर फिक्स कर दिया जाता है। पानी के सर्कुलेशन के लिए एक छोटी मोटर अंदर रखी जाती है जो पाइप के जरिए खस को गीला रखती है। जैसे ही पंखा चलता है, गीली खस से टकराकर आने वाली हवा कमरे को शिमला बना देती है।
सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी है इस जुगाड़ को लेकर बहस?
इस अनोखे कूलर का वीडियो वायरल होते ही कमेंट सेक्शन में सुझावों और तारीफों की बाढ़ आ गई है। जहां एक तरफ लोग इसे ‘मस्त जुगाड़’ बता रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स ने सुरक्षा को लेकर भी अपनी राय दी है। एक यूजर ने सलाह दी कि पंखे के आगे स्टील की जाली जरूर लगानी चाहिए ताकि किसी को चोट न लगे। कई लोगों का कहना है कि उनके घर में भी इसी तरह का जुगाड़ बरसों से इस्तेमाल हो रहा है। यह तकनीक उन लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है जो बाजार में मिल रहे महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का खर्च नहीं उठा सकते। नीले ड्रम का यह नया अवतार न केवल किफायती है बल्कि इस्तेमाल में भी काफी टिकाऊ नजर आ रहा है। कुल मिलाकर इस देसी तकनीक ने शहर की चकाचौंध के बीच गांव की समझदारी का लोहा मनवा दिया है।
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