Mirzapur The Movie: क्या आपने कभी किसी ऐसे खूंखार गैंगस्टर को देखा है जो अपनी प्रेमिका के लिए अपने हाथों से कपड़े सीता हो? बड़े पर्दे पर तहलका मचा रही मिर्जापुर फिल्म में रवि किशन ने ‘बब्बन बाबूआ यादव’ बनकर कुछ ऐसा ही जादू चलाया है कि लड़कियां उन्हें ‘ग्रीन फ्लैग गैंगस्टर’ बुलाने लगी हैं। आलम यह है कि रवि किशन की लोकप्रियता से फिल्म के मेकर्स तक घबरा गए थे। उन्हें डर था कि कहीं बब्बन यादव के प्रति दर्शकों का लगाव इतना न बढ़ जाए कि लोग कहानी के असली नायक गुड्डू पंडित और मुन्ना भैया को चीयर करना ही भूल जाएं। इसी दीवानगी को संभालने के लिए निर्देशक गुरमीत सिंह को फिल्म के क्लाइमेक्स और कुछ भावुक दृश्यों में बड़े बदलाव करने पड़े ताकि मुख्य किरदारों का दबदबा बना रहे।
क्यों बब्बन यादव के सामने सहम गए थे मेकर्स?
फिल्म के क्रिएटर पुनीत कृष्ण ने खुलासा किया है कि रवि किशन का किरदार इतना प्रभावी हो गया था कि उन्हें मुमताज की मौत वाले सीन को जानबूझकर कम इमोशनल बनाना पड़ा। अगर वह सीन अपनी मूल तीव्रता के साथ रहता, तो दर्शक फिल्म के मुख्य नैरेटिव से भटक सकते थे। इस भावना को संतुलित करने के लिए मेकर्स ने चंदू पंक्चर की मौत को और भी ज्यादा क्रूर दिखाया। बब्बन यादव का किरदार एक अपराधी होने के बावजूद अपनी पार्टनर के प्रति इतना वफादार और केयरिंग है कि इसने पारंपरिक विलेन की छवि को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। यही वजह है कि खूंखार अपराधों की दुनिया के बीच रवि किशन एक प्रेमी के रूप में दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं।
बॉक्स ऑफिस पर 150 करोड़ का धमाका और नई स्टार कास्ट
रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी इस फिल्म ने कमाई के मामले में झंडे गाड़ दिए हैं। 4 सितंबर को रिलीज हुई इस फिल्म ने महज 6 दिनों के भीतर ही 150 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन कर लिया है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी एक बार फिर कालीन भैया के खौफनाक अंदाज में लौटे हैं, वहीं अली फजल ने गुड्डू पंडित और दिव्येंदु ने मुन्ना भैया के रूप में अपनी धाक जमाई है। इस बार दर्शकों को एक बड़ा सरप्राइज बबलू पंडित के रूप में मिला है, जहां विक्रांत मैसी की जगह जितेंद्र कुमार ने अपनी नई ऊर्जा से स्क्रीन पर जान फूंक दी है।
क्लाइमेक्स की चुनौती और गुड्डू पंडित का कमबैक
निर्देशक गुरमीत सिंह के लिए सबसे बड़ी चुनौती फिल्म के उस फाइट सीक्वेंस को दिलचस्प बनाना था जिसकी परिणति लोग पहले से जानते थे। चूंकि गुड्डू, बबलू और मुन्ना जैसे बड़े किरदारों को मारने का विकल्प उनके पास नहीं था, इसलिए पूरा फोकस एक्शन की भव्यता पर रखा गया। जब सिनेमाघरों में गुड्डू पंडित के उठने वाला आइकॉनिक मोमेंट आया, तो दर्शकों की सीटियों और तालियों ने साबित कर दिया कि बड़े पर्दे पर मिर्जापुर का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। रवि किशन के अनोखे किरदार और मेकर्स की जबरदस्त प्लानिंग ने इस फिल्म को साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर की कतार में खड़ा कर दिया है।
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