School KG Fees Controversy: केजी क्लास की फीस 2.5 लाख, नर्सरी की पढ़ाई पर छिड़ी सोशल मीडिया पर जंग

School KG Fees Controversy: सोशल मीडिया पर वायरल हुई केजी क्लास की 2.5 लाख रुपये की फीस रसीद ने मचाया हंगामा, साल 2026 के सत्र की फीस देखकर लोग हैरान।

Rupali kumawat
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Rupali kumawat - Sub Editor
4 Min Read

School KG Fees Controversy: नर्सरी क्लास में महज ‘ट्विंकल-ट्विंकल लिटिल स्टार’ जैसी कविताएं सीखने के लिए क्या कोई ढाई लाख रुपये खर्च कर सकता है? सुनने में यह किसी मजाक जैसा लग सकता है, लेकिन साल 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए एक स्कूल का जो फीस स्ट्रक्चर सामने आया है, उसने पूरे देश के माता-पिता के होश उड़ा दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक रसीद ने निजी स्कूलों की अंधाधुंध फीस वसूली की पोल खोल कर रख दी है। इस पूरे हंगामे की शुरुआत साक्षी नाम की एक सॉफ्टवेयर डेवलपर की पोस्ट से हुई, जिन्होंने मजाकिया मगर तंज भरे लहजे में बताया कि कैसे नन्हे बच्चों की शुरुआती पढ़ाई अब आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर केजी क्लास का यह हाल है, तो आगे चलकर कॉलेज की पढ़ाई के लिए तो शायद जायदाद ही बेचनी पड़ जाए।

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आखिर रसीद में ऐसा क्या है जो लोग भड़क उठे?

इस वायरल फीस रसीद की बारीकियों पर गौर करें तो पता चलता है कि स्कूल ने सिर्फ दाखिले के नाम पर ही 15,000 रुपये वसूले हैं। इतना ही नहीं, 33,000 रुपये तो सिक्योरिटी मनी के तौर पर जमा कराए गए हैं, जो कभी वापस नहीं मिलेंगे। जब इसमें ट्यूशन फीस, लाइब्रेरी का खर्चा और जिमखाना जैसे चार्जेस जोड़े गए, तो साल 2026 का कुल बिल 2.25 लाख रुपये के पार पहुंच गया। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी भारी-भरकम रकम देने के बाद भी बच्चों के जूते, मोजे और कैंटीन का खर्चा इसमें शामिल नहीं है। यानी माता-पिता को इन बुनियादी चीजों के लिए अलग से मोटी रकम खर्च करनी होगी। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने यहां तक कह दिया कि उनकी खुद की पूरी 10वीं तक की पढ़ाई महज 15,000 रुपये में पूरी हो गई थी, जबकि आज केजी क्लास की एक टर्म की फीस भी उससे कई गुना ज्यादा है।

महंगी फीस के बावजूद क्यों मजबूर हैं अभिभावक?

समाज में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर लोग इतने महंगे स्कूलों की तरफ भाग क्यों रहे हैं। असल में निजी स्कूलों में मिलने वाली स्मार्ट क्लास, एयर कंडीशनर कमरे और मॉडर्न सुविधाएं माता-पिता को आकर्षित करती हैं। सरकारी स्कूलों के मुकाबले यहां इंग्लिश स्पीकिंग और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर ज्यादा जोर दिया जाता है। साथ ही प्राइवेट स्कूलों में क्लास के सेक्शन छोटे होते हैं, जिससे टीचर हर बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान दे पाते हैं। स्पोर्ट्स, म्यूजिक और डांस जैसी एक्टिविटीज का लालच भी पेरेंट्स को इन स्कूलों की तरफ खींचता है, भले ही इसके लिए उन्हें कर्ज ही क्यों न लेना पड़े। हालांकि, मिडिल क्लास परिवारों का अब साफ कहना है कि सरकार को निजी स्कूलों की इस मनमानी फीस पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि शिक्षा सिर्फ अमीरों का विशेषाधिकार बनकर न रह जाए।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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