Sonu Sood: नेपाल की धरती पर कुदरत के कहर ने जब हजारों जिंदगियां निगल लीं, तब पर्दे का यह विलेन एक बार फिर असल जिंदगी का हीरो बनकर सरहद पार पहुंच गया है। नेपाल-तिब्बत सीमा पर चट्टानें खिसकने से आई भीषण बाढ़ में जहां पूरा इलाका मलबे में तब्दील हो गया, वहीं सोनू सूद उस इकलौते घर के पास खड़े नजर आए जो इस तबाही में चमत्कारिक रूप से बच गया था। सोशल मीडिया पर वहां की हृदयविदारक तस्वीरें साझा करते हुए एक्टर ने उन बच्चों का दर्द दुनिया के सामने रखा जिन्होंने अपना घर और परिवार खो दिया है। सोनू ने साफ शब्दों में कहा कि नेपाल इस दुख की घड़ी में अकेला नहीं है और वे इन बिखरी हुई जिंदगियों को फिर से पटरी पर लाने का संकल्प ले चुके हैं।
क्या है नेपाल में तबाही का खौफनाक मंजर?
नेपाल के उत्तरी और मध्य हिस्सों में 26 अगस्त को आई इस आपदा ने जो जख्म दिए हैं, उनके आंकड़े रूह कंपा देने वाले हैं। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी की रिपोर्ट बताती है कि इस जलप्रलय में अब तक 1,100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। हालात इतने भयावह हैं कि करीब 4,000 लोग अब भी लापता हैं, जिनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। हालांकि राहत दलों ने 12,000 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पाई है, लेकिन तबाही का मंजर देखकर हर कोई दंग है। इसी संकट को भांपते हुए सोनू सूद अपनी टीम के साथ काठमांडू की सड़कों पर उतर आए हैं ताकि जमीनी स्तर पर मदद पहुंचाई जा सके।
कैसे दोबारा संवरेगी पीड़ितों की जिंदगी?
सूद चैरिटी फाउंडेशन के जरिए सोनू सूद ने नेपाल के प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री की खेप पहुंचानी शुरू कर दी है। द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, उन्होंने खुद खड़े होकर भारी मात्रा में कंबल और खाने-पीने का सामान वितरित किया है। सोनू का कहना है कि उनकी टीम केवल तात्कालिक मदद तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले कई महीनों तक प्रभावित समुदायों की जरूरतों का आकलन कर सहायता जारी रखेगी। भारत से लगातार ट्रकों के जरिए जरूरी सामान भेजा जा रहा है। एक्टर का मानना है कि इन मासूमों का बचपन और घर वापस तो नहीं लाया जा सकता, लेकिन एक नई शुरुआत में उनका हाथ थामकर उन्हें हौसला जरूर दिया जा सकता है।
क्यों बार-बार मसीहा बनते हैं सोनू सूद?
मानवीय सहायता के मामले में सोनू सूद का रिकॉर्ड किसी मिसाल से कम नहीं है। यह सिलसिला कोरोना काल में शुरू हुआ था, जब उन्होंने हजारों प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाकर दुआएं बटोरी थीं। इसके बाद साल 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान भी उन्होंने मोर्चा संभाला था। इतना ही नहीं, इसी साल मार्च में जब अमेरिका-ईरान संघर्ष की वजह से दुबई में भारतीय यात्री फंस गए थे, तब उनके रहने और खाने का पूरा खर्च सोनू ने ही उठाया था। अब नेपाल में उनकी मौजूदगी यह साबित करती है कि इंसानियत की कोई सीमा नहीं होती। सोनू सूद की इस पहल से न केवल पीड़ितों को आर्थिक मदद मिल रही है, बल्कि उन्हें इस बड़े मानसिक सदमे से उबरने की हिम्मत भी मिल रही है।
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