Sunita Ahuja: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता गोविंदा के घर इस बार गणेश चतुर्थी पर एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जहां परंपराओं को निभाने की कमान पूरी तरह से उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के हाथों में रही। हर साल बप्पा का स्वागत करने वाले गोविंदा इस बार उत्सव की शुरुआत में कहीं नजर नहीं आए, जिसने सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। असल में गोविंदा इस खास मौके पर भारत में मौजूद ही नहीं थे क्योंकि वे अपने किसी काम के सिलसिले में अमेरिका के दौरे पर गए हुए थे। सुनीता ने बताया कि उनके पति देर रात तक वापस लौटने वाले थे और लंबी यात्रा की थकान की वजह से शायद वे स्थापना के दिन शामिल न हो पाएं, लेकिन अगले दिन वे बप्पा का आशीर्वाद लेने जरूर पहुंचेंगे। सुनीता ने मुस्कुराते हुए साफ किया कि घर उन्हीं का है, इसलिए दर्शन करने तो उन्हें आना ही होगा।
क्या सुनीता ने पूरी की अपनी कोई खास मन्नत?
सालों से चली आ रही इस पारिवारिक परंपरा को लेकर सुनीता आहूजा ने कई दिलचस्प बातें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि गोविंदा के घर में गणपति लाने की यह रीत उनकी सास निर्मला देवी ने शुरू की थी, जिसे वे आज भी पूरी श्रद्धा से आगे बढ़ा रही हैं। इस साल की सबसे खास बात यह रही कि सुनीता ने अपनी एक पुरानी मन्नत पूरी की। अक्सर गोविंदा या उनके बेटे यशवर्धन ही बप्पा की मूर्ति लेकर घर आते थे, लेकिन इस बार सुनीता ने खुद नाचते-गाते हुए विघ्नहर्ता को घर लाने की इच्छा जताई थी। सुनीता का कहना है कि पिछला साल उनके लिए बहुत अच्छा रहा और बप्पा की कृपा से उन्हें काफी काम भी मिला, इसी खुशी में उन्होंने खुद आगे बढ़कर इस जिम्मेदारी को निभाया।
खराब रिश्तों की खबरों के बीच कैसा है घर का माहौल?
पिछले कुछ समय से गोविंदा और सुनीता के निजी रिश्तों में अनबन की खबरें लगातार मीडिया की सुर्खियों में रही हैं। यहां तक कि कई रिपोर्ट्स में उनके अलग होने और तलाक की अर्जी तक की बातें कही गई थीं, जिन्हें बाद में वापस लेने का दावा भी किया गया। हालांकि इन कयासों के बीच सुनीता ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल अपने बच्चों के भविष्य और अपने काम पर पूरा ध्यान दे रही हैं। उत्सव के दौरान घर में मेहमानों का तांता लगा रहा और बेहतरीन खाने के साथ नाच-गाने का दौर भी चला। सुनीता ने बप्पा से प्रार्थना की है कि उनके बच्चों का नाम रोशन हो और परिवार के सारे संकट दूर हो जाएं। डेढ़ दिन के इस उत्सव में भले ही पहले दिन गोविंदा शारीरिक रूप से मौजूद नहीं थे, लेकिन सुनीता ने पूरे उत्साह के साथ उत्सव की चमक को बरकरार रखा।
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