High Speed Test Track: भारतीय रेलवे अब अपनी ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा को परखने के लिए एक बेहद आधुनिक रास्ता तैयार कर रहा है. राजस्थान के जोधपुर मंडल में देश का पहला डेडिकेटेड हाई स्पीड टेस्ट ट्रैक बनाया जा रहा है. लगभग 967 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह प्रोजेक्ट अब अपने आखिरी दौर में है. जयपुर से महज 70 किलोमीटर दूर नावा इलाके में बन रहे इस ट्रैक पर वंदे भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेनों का ट्रायल किया जाएगा. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, साल 2027-28 तक यहां अलग-अलग तरह की ट्रेनों की टेस्टिंग शुरू होने की संभावना है. इस पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) संभाल रहा है.
इस हाई स्पीड टेस्ट ट्रैक की विशेषताएं?
यह प्रोजेक्ट न केवल ट्रेनों की गति बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय रेलवे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर लाकर खड़ा कर देगा. 59 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक को दो चरणों में मंजूरी दी गई थी और अब यह जल्द ही पूरी तरह चालू होने वाला है. इसकी प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
- इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 967.07 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं.
- गुढ़ा से थथाना मिठरी के बीच बन रहे इस ट्रैक की कुल लंबाई 59 किलोमीटर है.
- ट्रैक पर 220 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेनों का ट्रायल किया जा सकेगा.
- इस मार्ग पर 7 बड़े पुल, 129 छोटे पुल और 4 स्टेशन (गुढ़ा, जब्दीनगर, नावा और मिठरी) बनाए गए हैं.
- यहां रोलिंग स्टॉक के साथ-साथ सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रैक की मजबूती की भी जांच होगी.
ट्रैक के अलग-अलग हिस्सों में क्या होगा खास?
रेलवे ने इस 59 किलोमीटर के दायरे को अलग-अलग टेस्टिंग जरूरतों के हिसाब से बांटा है. इसमें एक 23 किलोमीटर की मुख्य लाइन है, जबकि गुढ़ा में 13 किलोमीटर का एक खास हाई स्पीड लूप बनाया गया है. इसके अलावा नावा में 3 किलोमीटर का एक्सेलरेटेड टेस्टिंग लूप और मिठरी में 20 किलोमीटर का घुमावदार यानी कर्व टेस्टिंग लूप तैयार किया जा रहा है. स्टैटिक टेस्टिंग के लिए 4.5 किलोमीटर का ट्विस्टेड ट्रैक पहले ही बनकर तैयार हो चुका है. 31 किलोमीटर से ज्यादा का हिस्सा सितंबर 2026 तक पूरी तरह फाइनल करने का लक्ष्य रखा गया है.
गुढ़ा स्टेशन पर क्या बदलाव किए गए हैं?
इस टेस्ट ट्रैक को मुख्य रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए गुढ़ा स्टेशन पर तकनीक में बड़े सुधार किए गए हैं. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां के इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम में बदलाव हुआ है. साथ ही पॉइंट ऑपरेशन और इंडिकेशन सर्किट को भी नया रूप दिया गया है ताकि टेस्टिंग के दौरान किसी भी तरह की दुर्घटना का खतरा न रहे. यह भारत की पहली ऐसी सुविधा होगी जहां अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे UIC-518 के आधार पर ट्रेनों की जांच की जाएगी.
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