अचानक सीकर के रैवासा धाम पहुंचे तीन प्रमुख हस्ति: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, योग गुरु बाबा रामदेव और पंडित इंद्रेश उपाध्याय

बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, योग गुरु बाबा रामदेव और वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित इंद्रेश उपाध्याय अचानक सीकर के रैवासा धाम पहुंचे। उनके आगमन पर हजारों लोग उन्हें देखने के लिए उत्सुक थे। उन्होंने दिवंगत अग्रपीठाधीश्वर स्वामी राघवाचार्य महाराज की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

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बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, योग गुरु बाबा रामदेव और वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित इंद्रेश उपाध्याय अचानक सीकर के रैवासा धाम पहुंचे। उनके आगमन पर हजारों लोग उन्हें देखने के लिए उत्सुक थे। उन्होंने दिवंगत अग्रपीठाधीश्वर स्वामी राघवाचार्य महाराज की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

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दोपहर 3:00 बजे रैवासा धाम पहुंचकर तीनों संतों ने मंदिर परिसर में समय बिताया। उन्होंने स्वामी राघवाचार्य जी महाराज के उत्तराधिकारी राजेंद्र दास जी महाराज से बातचीत की। इस दौरान स्थानीय लोगों ने बागेश्वर धाम और योग गुरु को फूलमालाओं से लाद दिया। भीड़ बागेश्वर बाबा की एक झलक पाने के लिए उत्सुक थी।

श्रद्धांजलि और मंदिर का दौरा

संतों की मौजूदगी से लोगों में उत्साह का माहौल है, कई लोग धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को देखने के लिए बेताब हैं। कुछ महिलाएं शास्त्री के लिए नारियल भी लेकर आई थीं। उनके साथ सेल्फी लेने की भी होड़ मची हुई थी। तीनों ने मंदिर परिसर में भगवान जानकी नाथ मंदिर में जाकर सनातन धर्म में शांति और खुशहाली की प्रार्थना की।

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इस दौरान हवामहल विधायक और हाथोज धाम के पीठाधीश्वर बाल मुकुंदाचार्य और जयपुर से अभिषेक गुप्ता भी मौजूद थे। इस अवसर पर इन आध्यात्मिक नेताओं के अपने अनुयायियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पर प्रकाश डाला गया।

रेवासा धाम में इन प्रमुख हस्तियों का अचानक आना स्वामी राघवाचार्य महाराज के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा को दर्शाता है। उनकी श्रद्धांजलि एक भावपूर्ण भाव था, जो वहां उपस्थित भक्तों को बहुत पसंद आया।

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इस कार्यक्रम में न केवल स्वामी राघवाचार्य महाराज का सम्मान किया गया, बल्कि सनातन धर्म के अनुयायियों के बीच एकता और श्रद्धा का भाव भी जगा।

इस यात्रा का समापन शांति और समृद्धि की प्रार्थना के साथ हुआ, जिसने इसे देखने वाले हर व्यक्ति पर एक अमिट छाप छोड़ी। रेवासा धाम में एकत्र हुए लोग स्वामी राघवाचार्य महाराज की स्थायी विरासत और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बाबा रामदेव और पंडित इंद्रेश उपाध्याय जैसे आध्यात्मिक नेताओं के निरंतर प्रभाव का प्रमाण थे।

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