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सावधान! लोगों के हार्ट-किडनी हो रहे फेल! तीन साल बाद भी दिख रहा कोरोना का असर, ये रिपोर्ट चौंका देगी- Covid Effects on Health Alert

कोरोना के साइड इफेक्ट्स तीन साल बाद भी जारी हैं। हार्ट, किडनी जैसे अंगों की विफलता और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जानें हालिया शोध के बारे में और कैसे यह कोरोना के प्रभावों को दर्शाता है।

Written by: Rajasthan Desk - News
4 Min Read

Covid Effects on Health Alert: कोरोना वायरस ने लाखों लोगों की जान ली और जो बच गए, उनमें से कई अब भी इसके प्रभाव से जूझ रहे हैं। कोरोना का खतरा भले ही अब ना रहा हो, लेकिन लोगों में इसके साइड इफेक्ट्स अब भी मौजूद हैं। जिसके कारण लोगों मेंं हार्ट, किडनी फेल होने समेत कई गंभीर बीमारियों के मामले बढ़े हैं।

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हाल ही में पेरिस के बिचैट अस्पताल के खोजकर्ताओं ने एक अध्ययन किया, जिसमें चौंकाने वाली बात सामने आई कि कोरोना होने के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने के 30 महीने बाद भी मरीजों में अंगों से जुडी दिक्कतों के कारण मौत या अस्पताल में भर्ती होने का खतरा बढ़ जाता है। इस खोज में लगभग 64,000 फ्रांसीसी लोगों को शामिल किया गया, जिनमें से कुछ को कोरोना के कारण अस्पताल में भर्ती होना पडा था।

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इस अध्ययन में पता चला कि अस्पताल में भर्ती हुए कोविड-19 मरीजों में से जिनकी औसत उम्र 65 साल थी, वे अस्पताल से छुट्टी मिलने के 30 महीने बाद भी मौत या अंगों की समस्याओं का शिकार हुए। इससे पता चलता है कि कोरोना के बाद के असर लंबे समय तक रहते हैं। खोजकर्ताओं के अनुसार, कोरोना से ठीक होने के बाद भी लगभग 60 प्रतिशत मरीजों में अंगों को नुकसान देखा गया।

लंबे कोविड का असर

लंबे कोविड का मतलब है कि मरीजों को कोरोना से ठीक होने के बाद भी थकान, सांस लेने में तकलीफ और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं बनी रहती हैं। इस खोज में यह भी पता चला कि कोरोना से ठीक होने के बाद औरतों में दिमागी परेशानियों के कारण अस्पताल में भर्ती होने की संभावना मर्दों के मुकाबले ज्यादा थी।

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खोजकर्ताओं ने यह भी पाया कि कोविड-19 के मरीजों को किसी भी कारण से अस्पताल में भर्ती होने का खतरा ज्यादा था, खासकर दिल, दिमाग, नसों और सांस से जुडी बीमारियों के लिए। इस अध्ययन में यह भी बताया गया कि कोविड-19 होने के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी गंभीर स्वास्थ्य दिक्कतें बनी रहती हैं।

रिसर्च में क्या हुआ खुलासा?

इस खोज के बारे में बिचैट अस्पताल के बीमारी विशेषज्ञ डॉ. सारा टुबियाना ने कहा, “यह खोज कोविड-19 के दूरगामी असर की याद दिलाती है, जो सिर्फ शुरुआती संक्रमण तक सीमित नहीं है।” उन्होंने कहा, “यह खोज लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह बताती है कि कोविड-19 से अस्पताल में भर्ती हुए लोग महीनों और सालों बाद भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ सकते हैं।”

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खोजकर्ताओं ने जनवरी से अगस्त 2020 के बीच कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती हुए 63,990 लोगों को 30 महीनों तक देखा। इसके साथ ही, उन लोगों का भी अध्ययन किया गया जो कोविड-19 से संक्रमित नहीं हुए थे। इस खोज का मकसद यह समझना था कि कोरोना के बाद अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों को किस तरह की लंबे समय तक रहने वाली स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

लंबे समय तक स्वास्थ्य देखभाल की ज़रूरत

इस खोज के नतीजे बताते हैं कि कोरोना से संक्रमित होने के बाद मरीजों को लगातार स्वास्थ्य देखभाल और निगरानी की ज़रूरत होती है। खोजकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि कोरोना के नए रूप के मामलों में यह खोज पूरी तरह से लागू नहीं हो सकती, लेकिन यह खोज कोविड-19 के बाद के असर को लंबे समय तक दिखाती है।

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