Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी पर्व इस बार 11 मार्च को धूमधाम से मनाया जाएगा। विशेष रूप से उत्तर भारत के राज्यों में लोकप्रिय इस त्योहार को बसोड़ा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना कर लोग मां शीतला से अपने परिवार के स्वास्थ्य की कामना करते हैं। इस मौके पर अंतिम बार बासी भोजन करने का रिवाज है, जिसे बाद में त्याग दिया जाता है।
शीतला पूजा की धूमधाम
गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में शीतला अष्टमी को लेकर खासा उत्साह देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन की पूजा से लोग रोग-संक्रमण से सुरक्षित रहते हैं। चैत्र माह की अष्टमी को मनाया जाने वाला यह पर्व इस बार 11 मार्च को मनाया जाएगा, जो 12 मार्च की सुबह तक चलेगा।
मां शीतला की अद्भुत महिमा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां शीतला की महिमा का वर्णन स्कंद पुराण में किया गया है। इनका वाहन गधा होता है और उनके हाथ में कलश, सूप, झाड़ू और नीम की पत्तियां होती हैं। गर्मियों में इनकी पूजा का महत्व बढ़ जाता है और शीतला अष्टमी पर उनकी विशेष आराधना की जाती है।
पूजा की विधि और परंपराएं
शीतला अष्टमी के दिन सुबह स्नान कर माता की पूजा का विशेष महत्व है। पूजा की थालियों में पुआ, दही, रोटी, बाजरा और गुड़ के मीठे चावल रखे जाते हैं। इसके अलावा, आटे से दीपक, रोली, हल्दी और कुछ सिक्के भी अर्पित किए जाते हैं। होलिका दहन स्थल पर जाकर भी विशेष पूजा की जाती है।
बच्चों के लिए विशेष उपाय
बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए मां शीतला को चांदी का चौकोर टुकड़ा अर्पित करने का रिवाज है, जिस पर मां की आकृति बनी हो। इसके बाद मां को खीर का भोग लगाकर पूजा की जाती है। पूजा के पश्चात चांदी के टुकड़े को लाल धागे में बांधकर बच्चे के गले में पहनाया जाता है।
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