Rajasthan High Court Decision: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि दशकों तक अस्थायी सेवा में रहने के बाद किसी कर्मचारी को नियमितीकरण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस रेखा बोराणा की एकल बेंच ने भीलवाड़ा के सत्यनारायण शर्मा और अन्य कर्मचारियों की याचिकाओं पर विचार करते हुए यह निर्णय सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तिथि से स्थाई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी माना जाएगा और उन्हें पेंशन सहित सभी सेवानिवृत्ति लाभ मिलेंगे।
अस्थायी कर्मचारियों को मिली राहत
इस फैसले से उन कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है जिन्होंने 40 साल से अधिक समय तक सरकारी विभागों में सेवा दी, लेकिन उन्हें नियमित नहीं किया गया था। सत्यनारायण शर्मा की नियुक्ति 5 अगस्त 1981 को लूणकरणसर की पंचायत समिति में बतौर गेट कीपर हुई थी। बाद में उनका पद बदलकर चुंगी नाका रक्षक कर दिया गया। 1998 में राज्य सरकार ने चुंगी कर्मियों की छंटनी पर रोक लगाई थी, लेकिन शर्मा को नियमित नहीं किया गया।
राज्य सरकार की तर्क पर अदालत का फैसला
सरकार का दावा था कि सत्यनारायण शर्मा की नियुक्ति नियमित प्रक्रिया से नहीं हुई थी और वे अस्थायी कर्मचारी थे। लेकिन कोर्ट ने पुराने निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि इतने लंबे समय तक की गई सेवा को अस्थायी नहीं माना जा सकता। यह सेवा उनके लिए मूल सेवा के रूप में गिनी जाएगी।
नियत लाभ और पेंशन का आदेश
फैसले के अनुसार, याचिकाकर्ताओं को नियमित कर्मचारी माना जाएगा और उन्हें सभी सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएंगे। हालांकि, वेतन निर्धारण के अनुसार किसी भी एरियर का दावा नहीं कर सकेंगे। इस निर्णय से कुल 11 कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जिनमें पाली और अन्य जिलों के कर्मचारी भी शामिल हैं।




