NEET paper leak: नीट यूजी 2026 पेपर लीक कांड में सीबीआई की जांच तेज हो गई है। सोमवार को एजेंसी ने महाराष्ट्र के लातूर से एक बड़े कोचिंग संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार कर लिया। यह मामले में 10वीं गिरफ्तारी है। इस घटना से कोचिंग हब सीकर (राजस्थान) समेत महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के कई जिलों में हड़कंप मच गया है।
सीबीआई के अनुसार, मोटेगांवकर रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस (RCC) के संस्थापक और डायरेक्टर हैं। उनके कोचिंग सेंटर का टर्नओवर करीब 100 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। लातूर समेत 7 जिलों में इसके ब्रांच हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि वह एक संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य था, जिसने परीक्षा से पहले पेपर लीक कर कई उम्मीदवारों तक पहुंचाया।
कोचिंग संचालक के पास पेपर कैसे पहुंचा?
सीबीआई ने रविवार को मोटेगांवकर के लातूर स्थित आवास और RCC के मुख्य कार्यालय पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान उनके मोबाइल फोन से नीट यूजी का लीक प्रश्नपत्र बरामद हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी ने 23 अप्रैल 2026 को ही अन्य आरोपियों के साथ मिलकर प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी हासिल कर ली थी — यानी परीक्षा (3 मई) से 10 दिन पहले।
एजेंसी का दावा है कि मोटेगांवकर ने लीक पेपर को हैंडराइटन नोट्स के रूप में कई लोगों तक पहुंचाया। लातूर के कुछ डॉक्टरों पर भी लीक पेपर खरीदने का शक है। 15 मई को सीबीआई ने उनसे 8 घंटे पूछताछ की थी। गिरफ्तारी के बाद उन्हें दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया, जहां 9 दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया गया है।
सीकर और राजस्थान में मचा हड़कंप क्यों है?
नीट पेपर लीक का मामला सबसे पहले राजस्थान के सीकर में एक कोचिंग टीचर द्वारा उजागर हुआ था। परीक्षा के तुरंत बाद एक छात्र के फोन पर PDF देखकर टीचर ने मिलान किया और पेपर लीक की पुष्टि की। इसके बाद सीकर के कोचिंग हब में छापेमारी हुई, RK Consultancy समेत कई जगहों पर तलाशी ली गई और गिरफ्तारियां हुईं।
सीकर में असामान्य रूप से ज्यादा टॉपर्स निकलने पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में 650+ स्कोरर्स की संख्या राष्ट्रीय औसत से कई गुना ज्यादा बताई जा रही है। लीक नेटवर्क राजस्थान, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों तक फैला हुआ प्रतीत होता है।
- शिवराज मोटेगांवकर का कोचिंग टर्नओवर करीब 100 करोड़ रुपये है।
- सीबीआई ने आरोपी को 9 दिन की हिरासत में ले लिया है।
- अब तक इस घोटाले में कुल 10 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।
- पेपर लीक का नेटवर्क महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली तक फैला है।
- शिकंजे में पुणे के रिटायर्ड प्रोफेसर और कई डॉक्टर भी शामिल हैं।
छात्रों के भविष्य और सिस्टम पर सवाल
पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला हुआ है। कई छात्रों ने तैयारी पर खर्च किए लाखों रुपये और मानसिक तनाव का हवाला देते हुए सुसाइड जैसे कदम उठाए। सीकर समेत देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। शिवसेना कार्यकर्ताओं ने लातूर के RCC सेंटर के बाहर भी प्रदर्शन किया। सीबीआई की जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। इस घोटाले ने पूरे मेडिकल एडमिशन सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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