Rajasthan Nikay Election: राजस्थान के सीकर जिले में नगर निकाय चुनाव के दौरान राजनीति के कई अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं। यहां चुनावी जंग केवल पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि परिवारों के भीतर भी शुरू हो गई है। कहीं सगे भाई एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, तो कहीं पिता ने अपने बेटे का रास्ता साफ करने के लिए खुद राजनीति से दूरी बना ली है। टिकट वितरण के बाद अब बगावत रोकने के लिए भी दोनों प्रमुख पार्टियों ने कमर कस ली है।
वार्ड नंबर 5 में भाई बनाम भाई की जंग क्यों है चर्चा में?
धोद के वार्ड नंबर 5 में मुकाबला काफी रोचक हो गया है। यहां परिवार के दो सदस्य ही एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं। गुमानाराम को माकपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि उनके सगे भाई अशोक ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरकर मुकाबले को घर की दहलीज तक पहुंचा दिया है।
इन चुनावी किस्सों में क्या खास है?
- पूर्व उप जिला प्रमुख शोभसिंह ने वार्ड 18 से अपना नाम मतदाता सूची से हटवा लिया ताकि उनके बेटे धर्मेंद्र सिंह भाजपा की तरफ से चुनाव लड़ सकें।
- फतेहपुर में दल-बदल का नजारा दिखा, जहां भाजपा के पूर्व पार्षद अरविंद योगी अब कांग्रेस के सिंबल पर चुनावी मैदान में हैं।
- भाजपा ने फतेहपुर के 55 वार्डों के लिए 55 प्रभारी नियुक्त किए हैं, जबकि पार्टी ने केवल 34 प्रत्याशी ही मैदान में उतारे हैं।
- रींगस के वार्ड 35 में प्रत्याशी ओमप्रकाश का नामांकन आपराधिक रिकॉर्ड होने की वजह से रद्द कर दिया गया।
- कई वार्डों में पति और पत्नी दोनों ने नामांकन दाखिल किए हैं, जिससे अब यह उलझन बनी हुई है कि कौन अपना नाम वापस लेगा।
बगावत रोकने के लिए पार्टियों ने क्या दांव चला है?
सीकर की 14 नगर निकायों में 40 से ज्यादा बागियों ने पार्टियों की चिंता बढ़ा दी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही सख्त निर्देश जारी किए हैं। पार्टी पदाधिकारियों को साफ कह दिया गया है कि जिस नेता ने जिसे टिकट दिलवाया है, बगावत रोकने और जीत दिलाने की पूरी जिम्मेदारी भी उसी की होगी। अब सबकी नजरें नाम वापसी की आखिरी तारीख पर टिकी हैं, जिसके बाद चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
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