Aaj Nirjala Ekadashi Ke Upay: आज 6 जून, शुक्रवार को देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ निर्जला एकादशी व्रत रखा जा रहा है। यह व्रत वर्ष की सभी एकादशियों का समस्त पुण्यफल एक साथ देने वाला माना जाता है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि को रखा जाने वाला यह उपवास सबसे कठिन व्रतों में से एक है, क्योंकि इसमें जल तक का सेवन नहीं किया जाता।
क्यों कहते हैं इसे भीमसेनी एकादशी?
महाभारत के अनुसार, जब भीमसेन वर्षभर व्रत नहीं रख पाते थे, तो उन्हें श्रीव्यासजी ने केवल एक दिन निर्जला व्रत करने की सलाह दी थी। तभी से यह व्रत भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाने लगा।
आज का शुभ मुहूर्त और पंचांग
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 6 जून, रात 2:15 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 7 जून, सुबह 4:47 बजे
- व्रत एवं पूजा का समय: आज पूरे दिन
शास्त्रों के अनुसार आज ही व्रत करना उचित और पुण्यदायी माना गया है।
व्रत के प्रमुख नियम
- निर्जल उपवास: जल तक का त्याग करना होता है। केवल तुलसी मिश्रित जल की कुछ बूंदें ली जा सकती हैं।
- अन्न, फलाहार और मसाले त्यागें: व्रती को नमक, तेल, फल और अनाज से दूर रहना चाहिए।
- ब्रह्मचर्य और संयम का पालन: मानसिक और शारीरिक पवित्रता बनाए रखें।
- क्रोध और कलह से दूरी: वाणी पर नियंत्रण रखें, किसी से बहस या विवाद से बचें।
- पूजा-पाठ और जागरण: विष्णु सहस्रनाम, भजन-कीर्तन, कथा श्रवण करें।
- दान-पुण्य करें: जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, पंखा, छाता आदि का दान करें।
- पारण: 7 जून को सूर्योदय के बाद तुलसी जल और सात्विक भोजन से व्रत खोलें।
किन्हें सावधानी रखनी चाहिए?
यदि आप किसी बीमारी से ग्रस्त हैं, गर्भवती हैं या वृद्ध हैं, तो निर्जल व्रत रखने से पहले चिकित्सक या धर्मगुरु की सलाह जरूर लें। ऐसे व्यक्ति फलाहार और जल के साथ नियमपूर्वक व्रत कर सकते हैं।
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