राजस्थान की 11 साल की बच्ची के पास है “तीसरी आंख”, आंखों पर पट्टी बांध कर पढ़ लेती है किताबें- Rajasthan News

Rajasthan News: राजस्थान की 11 साल की बच्ची देशभर में छाई है। इस बच्ची के पास स्पेशल पावर है इसलिए तो वो आंखों पर पट्टी बांधकर भी किताबें पढ़ लेती है। इस बच्ची ने वाकई में सबको हैरान करके रख दिया है।

Ravi Kumar
Written by:
Ravi Kumar - News Editor (Consultant)
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Rajasthan News: राजस्थान की 11 साल की बच्ची देशभर में छाई है। इस बच्ची के पास स्पेशल पावर है इसलिए तो वो आंखों पर पट्टी बांधकर भी किताबें पढ़ लेती है। इस बच्ची ने वाकई में सबको हैरान करके रख दिया है।

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भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र के गांव ब्रह्मवाद की जाटव बस्ती की रहने वाली है मेघा सिंह।

भरतपुर की मेघा सिंह की कहानी

मेघा सिंह की उम्र 11 साल बताई जा रही है। ये बच्ची आंखों पर पट्टी बांधकर किताबें पढ़ लेती है। साथ ही कलर आदि की भी पहचान बिना देखे कर लेती है। करीब एक माह से ये बच्ची ऐसा कर रही है। ये बात जो भी सुन रहा है वो इस बच्ची से मिलने या देखने के लिए उत्सुक हो जाता है। इस बच्ची ने अपने कारनामे से सबको हैरान कर दिया है।

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मेघा सिंह अभी कक्षा 7वीं की छात्रा है।

दीवार के पार की चीजों को भी बता देती है

इतना ही नहीं, ये भी कहा जा रहा है कि अगर दीवार के उस पार कुछ चीज रखी है तो मेघा उसे भी बता देने में सक्षम है। दीवार के पीछे कौन-सी चीज कहां रखी हुई है, ये भी मेघा बता देती है। किताब को बिना देखे पढ़ने के अलावा ये कर पाना लोगों को वाकई में हैरानी में डाल दिया है। मगर बच्ची ने मीडिया वालों के सामने भी ऐसा कर के दिखाया है।

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मेघा सिंह के माता पिता क्या करते हैं?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेघा के पिता का नाम राजेंद्र प्रसाद है जो सरकारी स्कूल के शिक्षक हैं। वहीं मेघा की मां आंगनबाड़ी में काम करती हैं। मेघा के माता का नाम मीना कुमारी है। मेघा का एक भाई है जिसका नाम जिज्ञासु कुमार है।

बता दें, मेघा सिंह ने पहले ये अकेले किया। बाद में, कुछ माह पहले ही मेघा सिंह ने माता-पिता को इसके बारे में बताया है।

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बच्ची को आंख पर पट्टी बांध चीजों को पहचानने की ट्रेनिंग

जब पिता को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने इसके बारे में परिचितों से बातचीत की। इसके बाद बच्ची को इस तरह के कला में निपुण करने के लिए ट्रेनिंग दी गई। जिसके बाद से ये बच्ची और भी अच्छी तरह से अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर पा रही है।

थर्ड आई एक्टिवेशन की ट्रेनिंग

जानकार बताते हैं कि ऐसे बच्चों को मिड ब्रेन एक्टिवेशन’ या ‘थर्ड आई एक्टिवेशन’ के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद ये बच्चे अपनी 5 इंद्रियों की शक्ति का इस्तेमाल अच्छी तरह कर पाते हैं। साथ ही विशेष बच्चों में ही ऐसा देखने को मिलता है।

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जयपुर में भी ऐसी बच्ची का मामला आया था

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब दो साल पहले जयपुर में ऐसा ही कुछ देखने को मिला था। भाविका नाम की बच्ची आंखें बंद कर सुई में धागा डाल देती थी और गणित के सवालों को बना लेती थी। उस वक्त भी भाविका को लेकर मीडिया में खूब चर्चा चली थी।

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