Middle East War impact: मध्य पूर्व के देशों में जारी तनाव ने भारत के आयात और निर्यात व्यापार की कमर तोड़ दी है। इस वैश्विक संकट का सीधा असर अब राजस्थान की राजधानी जयपुर में साफ़ देखा जा सकता है। पिंक सिटी के व्यापारियों का कारोबार ठप होने की कगार पर है, वहीं फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों के पास अब काम नहीं बचा है। जयपुर से होने वाली कंटेनर की आवाजाही अब घटकर महज 25 से 30 प्रतिशत रह गई है। यार्डों में हजारों खाली कंटेनर जमा हो रहे हैं क्योंकि विदेशों से डिमांड कम हो चुकी है और माल की ढुलाई रुकी हुई है।
निर्यात कम होने के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?
राजस्थान से पत्थर, कपड़े, फर्नीचर और जेवरात जैसे सामानों का भारी मात्रा में निर्यात किया जाता है। आमतौर पर इन सामानों को जयपुर से गुजरात के समुद्री बंदरगाहों तक भेजा जाता है, जहां से इन्हें जहाजों के जरिए दुनिया भर में पहुंचाया जाता है। हालांकि, युद्ध की वजह से अब समीकरण बदल गए हैं:
- समुद्री रास्तों में बदलाव के कारण जहाजों के आने-जाने का समय बढ़ गया है।
- शिपिंग कंपनियों ने टैरिफ में भारी बढ़ोतरी कर दी है जिससे माल भेजना महंगा हो गया है।
- परिवहन के बढ़ते खर्च और अंतरराष्ट्रीय मांग में कमी ने विदेशी ऑर्डर कम कर दिए हैं।
- बिंदायका और कनकपुरा जैसे इलाकों के यार्डों में कंटेनर खाली खड़े धूल फांक रहे हैं।
मजदूरों और ड्राइवरों के सामने क्यों आया रोजी-रोटी का संकट?
जयपुर के सिरसी और आसपास के यार्ड जो पहले मशीनों और मजदूरों की आवाज से गूंजते थे, वहां अब शांति छाई हुई है। पहले जहां रोजाना 50 से 60 कंटेनरों में माल भरा जाता था, अब वहां दिन भर में 10 कंटेनर का काम मिलना भी मुश्किल हो गया है। यार्ड के प्रबंधकों का कहना है कि काम की भारी कमी के कारण मजदूरों ने अब पलायन करना शुरू कर दिया है। क्रेन ऑपरेटर और ट्रक ड्राइवरों की कमाई पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। इस कारोबार से जुड़े लोग अब बस यही उम्मीद कर रहे हैं कि जंग जल्द खत्म हो ताकि पटरी से उतरा व्यापार फिर से रफ्तार पकड़ सके।


