Ektaa Kapoor on Hinduphobia: माथे पर तिलक और हाथ में कलावा बांधकर जब एक युवा फिल्म मेकर पार्टियों में जाती थी, तो उसे एक अजीब नजर से देखा जाता था। मशहूर निर्माता एकता कपूर ने मनोरंजन जगत के उस कड़वे सच से पर्दा उठाया है, जिसे अक्सर चमक-धमक के पीछे छिपा दिया जाता है। अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘द वन’ की कामयाबी का जश्न मना रही एकता ने एक पॉडकास्ट में बताया कि किस तरह फिल्म इंडस्ट्री का एक खास वर्ग भारतीय संस्कृति और लोककथाओं के नाम पर असहज हो जाता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बॉलीवुड में हिंदूफोबिया की जड़ें काफी गहरी हैं और अपनी आस्था को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने पर उन्हें कई बार भेदभाव और तानों का सामना करना पड़ा है।
क्या भारतीय लोककथाओं से डरता है सिनेमा जगत?
रणवीर अल्लाहबादिया के साथ बातचीत में एकता कपूर ने फिल्म ‘द वन’ के जरिए भारतीय जड़ों की ओर लौटने की बात की। एकता का मानना है कि इंडस्ट्री में पश्चिमी सभ्यता या विदेशी एनिमेशन को तो आसानी से गले लगा लिया जाता है, लेकिन जब बात अपनी पौराणिक कथाओं या लोककथाओं की आती है, तो लोग हिचकिचाने लगते हैं। उन्होंने कैमरे पर बेबाकी से स्वीकार किया कि आज भी एक बड़ा तबका इन विषयों पर चर्चा करने में परेशानी महसूस करता है। हालांकि, एकता ने यह भी उम्मीद जताई कि अब धीरे-धीरे दर्शकों और इंडस्ट्री के नजरिए में बदलाव आ रहा है और लोग इन कहानियों को स्वीकार कर रहे हैं।
टीका और कलावा पहनने पर क्यों उड़ाया जाता था मजाक?
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए एकता कपूर ने बताया कि कम उम्र में अपनी धार्मिक पहचान को जाहिर करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। उन्होंने एक किस्सा साझा किया जब वह सीधे मंदिर से किसी क्लब या हाई-प्रोफाइल पार्टी में पहुंच जाती थीं। वहां मौजूद लोग उनके माथे पर टीका देखकर हैरान रह जाते थे और उनसे सवाल करते थे कि क्या वह सच में मंदिर से आ रही हैं। एकता ने इस रूढ़िवादी सोच पर सवाल उठाया कि आखिर आधुनिक जीवनशैली और धार्मिक भक्ति एक साथ क्यों नहीं चल सकतीं। उस दौर में उन्हें अपनी इन्ही आदतों की वजह से अक्सर ‘फ्रीक’ कहकर जज किया जाता था।
कैसी है फिल्म द वन की कहानी और स्टार कास्ट?
दीपक कुमार मिश्रा के निर्देशन में बनी फिल्म ‘द वन – फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस फैंटेसी थ्रिलर में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं, जबकि सुनील ग्रोवर, श्वेता तिवारी, मनीष पाल और अनुपम सोनी जैसे सितारों ने अपनी एक्टिंग से जान फूंकी है। 25 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली यह फिल्म बिहार के पटना जिले के बिहता में स्थित मां वन देवी मंदिर की लोककथाओं से प्रेरित है। प्रतिबंधित जंगल और अलौकिक शक्तियों के इर्द-गिर्द बुनी गई इस फिल्म को क्रिटिक्स से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन इसकी अनोखी थीम ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
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