Sony SAB actors Navratri special: मनीष वाधवा से लेकर नितिन बाबू तक, इन सितारों की सफलता के पीछे है इन महिलाओं का हाथ

Sony SAB actors Navratri special: मनीष वाधवा, नितिन बाबू और जितेन लालवानी ने नवरात्रि पर अपनी जिंदगी की प्रेरणादायक महिलाओं और उनकी कामयाबी के राज से पर्दा उठाया है।

Rupali kumawat
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Rupali kumawat - Sub Editor
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Sony SAB actors Navratri special: किसी के लिए उसकी मां संस्कारों की पाठशाला है, तो कोई अपनी बहन के मौन समर्थन को अपनी सबसे बड़ी ढाल मानता है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर छोटे पर्दे के मशहूर कलाकारों ने अपनी जिंदगी के उन पन्नों को पलटा है, जिनमें उनकी कामयाबी का असली राज छिपा है। सोनी सब के चहेते सितारों मनीष वाधवा, नितिन बाबू और जितेन लालवानी ने खुलकर बताया कि उनके करियर और व्यक्तित्व को गढ़ने में उनके घर की महिलाओं का कितना बड़ा योगदान रहा है। इन एक्टर्स का मानना है कि मां दुर्गा की शक्ति का असली रूप उन्हें अपने ही घर की औरतों में नजर आता है, जो हर मुश्किल घड़ी में चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी रहती हैं।

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भीष्म पितामह के संस्कारों के पीछे किसका हाथ है?

धारावाहिक हस्तिनापुर के वीर में भीष्म पितामह जैसा दमदार किरदार निभाने वाले मनीष वाधवा अपनी असल जिंदगी में अपनी मां को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं। मनीष का कहना है कि आज वे जो कुछ भी हैं और उनके भीतर जो मानवीय मूल्य हैं, वे सब उनकी मां की ही देन हैं। उनकी मां ने ही उन्हें सिखाया कि पद और प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर हर इंसान का सम्मान करना चाहिए। मनीष के अनुसार उनकी मां द्वारा दिए गए दया और समानता के ये सबक ही उनके जीवन की असली शक्ति हैं, जिन्हें वे हर दिन अपने काम और व्यवहार में शामिल करने की कोशिश करते हैं।

बहन और पत्नी कैसे बनीं इन सितारों की हिम्मत?

रिश्तों की इस खूबसूरती में पुष्पा इम्पॉसिबल के चिराग यानी नितिन बाबू के लिए उनकी बहन किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं। नितिन बताते हैं कि भले ही भाई-बहन में नोकझोंक होती हो, लेकिन जब भी उन पर कोई मुसीबत आती है, उनकी बहन सबसे पहले उनके साथ खड़ी होती है। वहीं दूसरी ओर हस्तिनापुर के वीर में द्रोणाचार्य की भूमिका निभा रहे जितेन लालवानी ने तो अपनी कामयाबी का पूरा श्रेय अपने घर की चार महिलाओं को दे दिया है। जितेन के लिए उनकी मां, पत्नी, बेटी और यहां तक कि उनकी सास भी प्रेरणा का बड़ा केंद्र हैं। जितेन बताते हैं कि जहां उनकी पत्नी हर उतार-चढ़ाव में उनका सहारा बनीं, वहीं उनकी डॉक्टर सास दूसरों की सेवा करने का जज्बा सिखाती हैं।

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नई पीढ़ी से क्या सीखते हैं जितेन लालवानी?

जितेन लालवानी सिर्फ बड़ों से ही नहीं, बल्कि अपनी बेटी से भी जीवन के नए सबक सीख रहे हैं। वे कहते हैं कि उनकी बेटी के भीतर नई चीजों को जानने की जो ललक है, वही उन्हें हर दिन ऊर्जा से भर देती है। चाहे डांस हो, संगीत हो या फिर कोई नई भाषा, अपनी बेटी को दुनिया को एक्सप्लोर करते देखना जितेन को एक बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करता है। नवरात्रि के इस खास मौके पर इन सभी कलाकारों ने यह संदेश दिया है कि एक पुरुष की सफलता के पीछे सिर्फ उसका संघर्ष नहीं, बल्कि उन महिलाओं का अटूट विश्वास और धैर्य भी होता है जो पर्दे के पीछे रहकर उसे मजबूती प्रदान करती हैं।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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