Reporting Live Review:
एक जर्जर पुल का अचानक ढह जाना महज एक हादसा था या किसी बड़े भ्रष्टाचार की आहट, इसी गुत्थी को सुलझाने की जद्दोजहद में परिणीति चोपड़ा नेटफ्लिक्स पर अपनी नई क्राइम थ्रिलर के साथ लौट आई हैं। अवैध रेत खनन जैसे गंभीर और डरावने विषय पर आधारित यह फिल्म दिखाती है कि जब सत्ता और पैसा हाथ मिला लेते हैं, तो सच की आवाज उठाना जान जोखिम में डालने जैसा होता है। कहानी की शुरुआत एक गांव से होती है जहां संध्या यादव नाम की एक निडर पत्रकार अपने कैमरामैन विनोद के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए पहुंचती हैं। शिवा काका नाम के एक बुजुर्ग से मुलाकात के बाद संध्या को अहसास होता है कि पानी के नीचे से रेत चुराने वाला यह माफिया कितना रसूखदार और खतरनाक है।
क्या सच दिखाने की कीमत जान से बढ़कर है?
फिल्म के निर्देशक ध्रुव त्रिपाठी ने अपनी पहली ही कोशिश में पत्रकारिता के उस काले पक्ष को छूने की कोशिश की है, जहां एक रिपोर्टर को न सिर्फ अपनी नौकरी बल्कि अपनी जिंदगी की सुरक्षा के लिए भी लड़ना पड़ता है। संध्या और विनोद की जोड़ी जब माफिया के नेटवर्क की परतें खोलना शुरू करती है, तो कहानी में रोमांच बढ़ने लगता है। हालांकि पटकथा में कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां राजनीति का प्रभाव और गहरा हो सकता था। फिल्म की गति करीब 1 घंटा 56 मिनट के रनटाइम में संतुलित रहती है, लेकिन कुछ मोड़ ऐसे हैं जिनका अंदाजा दर्शक पहले ही लगा लेते हैं। अगर स्क्रिप्ट में थोड़े और चौंकाने वाले ट्विस्ट होते, तो यह थ्रिलर और भी ज्यादा असरदार साबित हो सकती थी।
एक्टिंग के मामले में किसने मारी बाजी?
अभिनय की बात करें तो संध्या यादव के रूप में परिणीति चोपड़ा ने एक दृढ़निश्चयी पत्रकार के भावों को बखूबी पकड़ा है। उनके साथ देवेन भोजानी का तालमेल कहानी को एक मानवीय आधार देता है। दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर ने शिवा काका के छोटे लेकिन प्रभावी रोल में अपनी छाप छोड़ी है। फिल्म में आदिल हुसैन, शेखर सुमन और शाश्वत चटर्जी जैसे बड़े नाम भी मौजूद हैं, लेकिन उन्हें स्क्रीन पर उतना समय नहीं मिला जितने वे हकदार थे। इन मंझे हुए कलाकारों का पूरा इस्तेमाल न कर पाना फिल्म की एक बड़ी कमी लगती है। इसके बावजूद, फिल्म का विषय और परिणीति की मेहनत इसे एक बार देखने लायक बनाती है।
वीकेंड पर नेटफ्लिक्स पर क्या यह फिल्म पैसा वसूल है?
रिपोर्टिंग लाइव उन लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है जो सामाजिक मुद्दों और अपराध के मेल वाली फिल्में देखना पसंद करते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका विषय है जो आज के दौर में बेहद प्रासंगिक है। हालांकि, जो दर्शक बहुत ज्यादा सस्पेंस या हर मोड़ पर धमाके की उम्मीद कर रहे हैं, उन्हें यह थोड़ी सरल लग सकती है। अवैध खनन के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब करने की यह जद्दोजहद एक जरूरी संदेश देती है। अगर आप बहुत ज्यादा भारी भरकम थ्रिलर की जगह एक सीधी और सच्ची लगने वाली कहानी देखना चाहते हैं, तो इस वीकेंड नेटफ्लिक्स पर संध्या यादव की इस रिपोर्टिंग को अपनी लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।
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