JASSM-ER Missile: पश्चिम एशिया के हालात एक बार फिर विस्फोटक मोड पर पहुंच गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह खबर सामने आ रही है कि बाइडन प्रशासन के बाद अब ट्रंप ने भी सैन्य विकल्प खोल दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना अपने हथियारों के जखीरे से सबसे आधुनिक और लंबी दूरी की मिसाइलों को ईरान के खिलाफ मोर्चे पर लगाने की योजना बना रही है। इस रणनीति के तहत अमेरिका की योजना अपनी सबसे शक्तिशाली मिसाइलों का बड़ा हिस्सा इस अभियान में झोंकने की है।
ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट चौंकाने वाले आंकड़े पेश करती है। इसके मुताबिक अमेरिका अपनी कुल जेएएसएसएम-ईआर मिसाइलों का लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा ईरान से निपटने के लिए सुरक्षित कर चुका है। अगर यह तैनाती होती है, तो अमेरिका के पास दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए बहुत कम संख्या में हथियार शेष रहेंगे।
ईरान को मिले 48 घंटों के अल्टीमेटम का सच क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। ट्रंप का कहना है कि ईरान के पास शांति समझौते को स्वीकार करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समझौते की शर्तों को नहीं माना गया, तो अंजाम बहुत बुरा होगा। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पहले ही 10 दिन की मोहलत दी थी, जिसके अब आखिरी 48 घंटे बचे हैं। ट्रंप के तेवर बताते हैं कि समय सीमा खत्म होते ही बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू हो सकती है।
आखिर कितनी विनाशकारी है यह मिसाइल?
लॉकहीड मार्टिन द्वारा तैयार की गई यह मिसाइल अमेरिकी वायुसेना की रीढ़ मानी जाती है। इसे दुश्मन के अभेद्य किलों और सुरक्षा घेरों को तोड़ने के लिए ही बनाया गया है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- यह मिसाइल लगभग 930 किलोमीटर की दूरी से दुश्मन पर सटीक प्रहार कर सकती है।
- इसमें 1000 पाउंड वजन का बेहद शक्तिशाली विस्फोटक लगा होता है।
- यह दुश्मन के रडार को चकमा देने वाली तकनीक से लैस होकर चुपचाप हमला करती है।
- इसे एफ-16 जैसे फाइटर जेट और बी-52 जैसे भारी बमवर्षक विमानों से भी दागा जा सकता है।
- यह जमीन के नीचे बने बंकरों और सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट करने की क्षमता रखती है।
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