Khatu Shyamji Temple: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। मंदिर प्रशासन ने मौसम में बदलाव को देखते हुए बाबा श्याम की आरती और दर्शन के समय में संशोधन किया है। अगर आप भी बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने की योजना बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले नए शेड्यूल को अच्छी तरह समझ लें। यह परिवर्तन 3 अप्रैल से प्रभावी हो चुका है, इसलिए पुराने समय के भरोसे जाना आपको परेशानी में डाल सकता है।
आरती के समय में क्या बदलाव किए गए हैं?
श्री श्याम मंदिर कमेटी ने चैत्र शुक्ल से वैशाख कृष्ण पक्ष के बीच बदलते मौसम को देखते हुए समय सारणी को अपडेट किया है। अब मंदिर में प्रमुख आरतियां नए निर्धारित समय पर संपन्न होंगी। मुख्य बदलाव सुबह की श्रृंगार आरती और शाम की संध्या आरती में देखा गया है। भक्त अब नीचे दी गई सूची के अनुसार अपनी यात्रा और पूजा का प्लान बना सकते हैं।
- श्रृंगार आरती: अब यह आरती सुबह 7:30 की जगह 15 मिनट पहले यानी सुबह 7:15 बजे आयोजित की जाएगी।
- संध्या आरती: शाम को होने वाली इस आरती का समय अब 7:00 बजे से बढ़ाकर शाम 7:15 बजे कर दिया गया है।
- अगले आदेश तक मंदिर में पूजा और दर्शन इसी नई व्यवस्था के तहत संचालित किए जाएंगे।
बाबा श्याम के दरबार की दिनचर्या कैसी होती है?
खाटूधाम में पूरे दिन के भीतर कुल पांच मुख्य आरतियां की जाती हैं। इन सभी आरतियों का अपना विशेष महत्व है और इस दौरान मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भीड़ से भरा रहता है। पूरा वातावरण ‘हारे के सहारे’ के जयकारों से गूंज उठता है।
- मंगला आरती: यह दिन की पहली आरती होती है जो सुबह जल्दी की जाती है।
- श्रृंगार आरती: इसमें बाबा श्याम का भव्य श्रृंगार कर आरती उतारी जाती है।
- भोग आरती: बाबा को विशेष व्यंजनों का भोग लगाते समय यह पूजा होती है।
- संध्या आरती: सूरज ढलने के समय की जाने वाली यह आरती अब नए समय पर होगी।
- शयन आरती: रात को मंदिर के कपाट बंद होने से पहले की जाने वाली अंतिम आरती।
किन खास मौकों पर बंद रहते हैं दर्शन?
श्रद्धालुओं को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि मंदिर में कुछ विशेष तिथियों पर आम जनता के लिए दर्शन बंद रखे जाते हैं। हर महीने की अमावस्या के अतिरिक्त बड़े त्योहारों जैसे होली, दिवाली और रक्षाबंधन के ठीक बाद मंदिर के पट करीब 20 घंटों के लिए बंद किए जाते हैं। इस अवधि में बाबा श्याम का विशेष तिलक और श्रृंगार कार्य संपन्न किया जाता है। ज्ञात हो कि हर साल करीब एक करोड़ लोग इस पावन धाम में मत्था टेकने पहुंचते हैं।
Want a Website like this?
Designed & Optimized by Naveen Parmuwal
Journalist | SEO | WordPress Expert


