Organic Farming: सीकर के किसान ने उगाया पांच रंगों का मक्का, पीएम मोदी भी कर चुके हैं तारीफ

Organic Farming: सीकर के प्रगतिशील किसान संजय यादव ने 5 रंगों का मक्का उगाकर मिसाल पेश की है, उनके जैविक मॉडल की सराहना पीएम मोदी भी कर चुके हैं।

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Rajasthan Desk - News
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Organic Farming: राजस्थान के सीकर जिले में एक किसान ने अपनी सूझबूझ से खेती को मुनाफे का सौदा बना दिया है। केवल आठवीं कक्षा तक पढ़े संजय यादव ने अपने खेत में पांच अलग-अलग रंगों का मक्का उगाकर सबको चौंका दिया है। उनकी इस कामयाबी और जैविक मॉडल की जानकारी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ले चुके हैं। संजय ने पारंपरिक रासायनिक खेती को छोड़कर तकनीक और प्रकृति का ऐसा मेल बैठाया है कि अब कृषि वैज्ञानिक भी उनके पास शोध के लिए पहुंच रहे हैं।

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रंगबिरंगे मक्के और जैविक मॉडल की शुरुआत कैसे हुई?

संजय यादव ने खेती में बदलाव लाने के लिए सबसे पहले मशरूम उत्पादन और प्राकृतिक खेती की बारीकियां सीखीं। उन्होंने करीब दो साल तक अपने खेत पर कड़ी मेहनत और रिसर्च की, जिसके बाद वे पांच रंगों वाला मक्का उगाने में सफल रहे। आज इस खास मक्के की मांग बड़े होटलों और रेस्टोरेंट में बहुत ज्यादा है। अपनी इस उपलब्धि के लिए उन्होंने अब पेटेंट के लिए भी आवेदन कर दिया है।

आमदनी बढ़ाने के लिए किन नुस्खों का किया इस्तेमाल?

संजय बताते हैं कि पहले वे बाजार से महंगे कीटनाशक और खाद खरीदते थे, जिससे बचत बहुत कम होती थी। लेकिन जब से उन्होंने घर पर ही जैविक खाद बनाना शुरू किया है, उनका खर्च घट गया और मुनाफा 70 प्रतिशत तक बढ़ गया है। उनके फार्म की कुछ खास बातें इस प्रकार हैं:

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  • खेत में केवल देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से बनी खाद जैसे जीवामृत और घनजीवा अमृत का उपयोग।
  • बाजार के जहरीले कीटनाशकों की जगह अग्नि अस्त्र, ब्रह्मास्त्र और पंचगव्य का इस्तेमाल।
  • एक ही खेत में कई तरह की फसलें उगाकर मिश्रित खेती को बढ़ावा देना।
  • सीजनल सब्जियों के साथ-साथ हल्दी और काली हल्दी की पैदावार।
  • मशरूम की तीन अलग-अलग किस्मों से सालाना पांच लाख रुपये तक की अतिरिक्त कमाई।

संजय का खेत कैसे बना किसानों के लिए पाठशाला?

पिपराली स्थित संजय का कृषि फार्म अब केवल खेती की जमीन नहीं, बल्कि एक ट्रेनिंग सेंटर बन चुका है। यहां वे अब तक 150 से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती का गुर सिखा चुके हैं। उनके काम को देखते हुए दिल्ली में आयोजित धनधान्य योजना के कार्यक्रम में पीएम मोदी ने भी उनसे सीधा संवाद किया था। आज वे न केवल सब्जियां बेचकर तीन से चार लाख कमा रहे हैं, बल्कि देसी गाय के दूध और घी से भी लाखों की आय कर रहे हैं। दूर-दराज के राज्यों से भी किसान उनके इस मॉडल को देखने सीकर आ रहे हैं।

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