The One Force Of The Forest: बिहार के 400 साल पुराने रहस्यमयी मंदिर पर आधारित है सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म

The One Force Of The Forest: सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म बिहार के पटना स्थित बिहटा के 400 साल पुराने रहस्यमयी वन देवी मंदिर की सच्ची लोककथाओं पर आधारित है।

Rupali kumawat
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Rupali kumawat - Sub Editor
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The One Force Of The Forest: बिहार के पटना जिले में एक ऐसा मंदिर है जहां सूरज ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है और परिंदा भी पर नहीं मारता। इसी खौफनाक लोककथा और 16वीं सदी के रहस्य को पर्दे पर उतारने की तैयारी कर ली है अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा ने। उनकी आगामी फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बिहटा इलाके में स्थित मां वन देवी का वह मंदिर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि रात के अंधेरे में वहां स्वयं देवी विचरण करती हैं। करीब 400 साल पुराने इस मंदिर के इतिहास और वहां की अनसुलझी पहेलियों को आधार बनाकर मेकर्स ने एक ऐसी कहानी बुनी है जो दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देगी। टीजर में दिखने वाला वह घना जंगल और उसके बीच खड़ा रहस्यमयी ढांचा असल में इसी मंदिर की मान्यताओं से प्रेरित है।

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क्यों सूर्यास्त के बाद इस मंदिर में जाने से थरथराते हैं लोग?

इस फिल्म की जड़ों में छिपा है 16वीं सदी का वह दौर जब अमहारा और राघोपुर के जंगलों में कुछ ऐसी घटनाएं घटी थीं जिन्होंने इंसानों का वहां जाना दुश्वार कर दिया था। आज भी यह परंपरा कायम है कि मंदिर के कपाट बंद होते ही पुजारी समेत हर कोई वहां से निकल जाता है। द वायरल फीवर के अरुणाभ कुमार ने जब खुद इस जगह का दौरा किया और स्थानीय ग्रामीणों से बात की, तो उन्हें एहसास हुआ कि इस कहानी को दुनिया के सामने लाना जरूरी है। उन्होंने दो साल तक इस पर शोध किया और फिर पंचायत फेम निर्देशक दीपक मिश्रा के साथ मिलकर इसे एक बड़े सिनेमाई अनुभव में बदल दिया। एकता कपूर ने भी इस प्रोजेक्ट की भव्यता को देखते हुए तुरंत इसका हिस्सा बनने का फैसला किया।

वीएफएक्स और सितारों की फौज से सजेगा रोमांच

इस काल्पनिक दुनिया को हकीकत में बदलने के लिए मेकर्स ने आधुनिक तकनीक और भारी भरकम स्पेशल इफेक्ट्स यानी वीएफएक्स का सहारा लिया है। निर्देशक दीपक मिश्रा का मानना है कि एक डरावना और प्रामाणिक अनुभव देने के लिए एनिमेशन का सही तालमेल बिठाना सबसे बड़ी चुनौती थी। फिल्म में केवल सिद्धार्थ मल्होत्रा ही नहीं, बल्कि तमन्ना भाटिया भी मुख्य भूमिका में अपनी चमक बिखेरेंगी। इनके साथ ही पर्दे पर सुनील ग्रोवर, मनीष पॉल, अनूप सोनी और अजय राजू जैसे मंझे हुए कलाकार अहम किरदारों में नजर आने वाले हैं। यह फिल्म केवल एक फंतासी नहीं है, बल्कि बिहार की उस सांस्कृतिक विरासत और डर का मेल है जिसे सदियों से सीने में दबाकर रखा गया है।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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