Shekhawati Martyr: शेखावटी के शहीदों की कहानी, वो 6 शहीद जिन्होंने देश के लिए खुद को किया कुर्बान

Shekhawati Martyr: इस वर्ष हम हमारा 78वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं। हमारे देश को आजादी मिलने की कहानी बहुत बड़ी है और न जाने कितने वीरों ने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया था। आज हम शेखावटी के शहीदों की कहानी यहां पढ़ेंगे।

Rupali kumawat
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Rupali kumawat - Sub Editor
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Shekhawati Martyr: इस वर्ष हम हमारा 78वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं। हमारे देश को आजादी मिलने की कहानी बहुत बड़ी है और न जाने कितने वीरों ने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया था। तब जाकर हमें ये आजादी मिली।

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परंतु, आजादी मिल जाने के बाद भी हमारे देश में बहुत युद्ध हुए और हमारे भारतीय सैनिकों ने उसमें दम-खम दिखाया। हमारी मातृभूमि की रक्षा की। मातृभूमि पर न्योछावर हो जाने वाले व्यक्तियों में हमारे राजस्थान के काफी लोग भी शहीद हो गए थे, जिसमें से शेखावाटी अंचल के शहीद भी हैं।

आज के इस लेख में हम बात करेंगे हमारे शेखावाटी की माटी में जन्मे महान शहीदों की, जिन्होंने मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। सबका वर्णन तो संभव नहीं लेकिन कुछ का जिक्र हम यहां करने जा रहे हैं।

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शहीद विनोद नागा

कारगिल में ऑपरेशन विजय के दौरान 30 में 1999 को देश के नाम जान कुर्बान करने वाले रामपुर के शहीद विनोद नागा अपने परिवार से भारतीय सेवा में जाने वाले दूसरे शख्स थे वे कई युद्ध के गवाह बने।

शहीद बनवारी लाल

सेवक बड़ी के शहीद बनवारी लाल बागड़िया के बलिदान के सामने सर्वोच्च शब्द भी बहुत छोटा लगता है कारगिल युद्ध के दौरान 15 मई 1999 को पाकिस्तानी दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए।

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शहीद श्योदानाराम

1971 मैं भारत-पाकिस्तान युद्ध काल में हरिपुरा गांव में जन्मे शो दानाराम के जहां में देशभक्ति का जज्बा जन्म से ही था और कारगिल युद्ध में उन्हें भी शहादत मिली।

शहीद दयाचंद जाखड़

1 जुलाई 1967 में लक्ष्मणगढ़ के रहना मां गांव के पास के दयाचंद जाखड़ ने राष्ट्र सेवा की भावना अपने पिता से सीखी और कारगिल युद्ध के दौरान 12 जून 1999 की सुबह एक गोली दयाचंद के फौलादी शरीर को चीरते हुए निकल गई।

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शहीद गणपतसिंह ढाका

सी हॉट निवासी शहीद गणपत सिंह ढाका उनके पिता रतनलाल 1965 के पराक्रम के दौरान पाकिस्तानी फौज के चंगुल में फंस गए थे और उन्हें बहुत तकलीफ झेलनी पड़ी इसी बात को सुनकर गणपत सिंह ढाका बड़े हुए थे और उनमें देशभक्ति की भावना शुरू से विकसित हुई। देशभक्ति की दीवानगी उसमें इस हद तक थी कि जिस उम्र में सेहरा बांधने की तैयारी होती है कारगिल युद्ध के दौरान वे शहीद हो गए।

शहीद सीताराम कुमावत

16 जून 1999 को शहीद हुए सीताराम कुमावत बास्केटबॉल प्लेयर थे और इसी कोटे से वे सेना मे शामिल हो गए और शादी के महज 3 वर्ष बाद वे वीरगति को प्राप्त हो गए।

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आज हम आजाद भारत में निवास कर रहे हैं तो इसके पीछे बहुत सारे शहीदों का योगदान है तो हमें उसे आजादी का सम्मान करना चाहिए और अपने अच्छे नागरिक की भूमिका का निर्वहन करना चाहिए।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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