Premanand Ji Maharaj Yudhishthira Curse Story: अक्सर समाज में यह कहावत सुनी जाती है कि “औरतों के पेट में कोई बात नहीं पचती” या महिलाएं किसी राज को ज्यादा दिन तक राज नहीं रख सकतीं। हाल ही में प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Ji Maharaj Pravachan) ने अपने सत्संग के दौरान इस बात के पीछे छिपे पौराणिक और आध्यात्मिक कारण पर प्रकाश डाला। उन्होंने महाभारत काल की एक मार्मिक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि यह महज एक स्वभाव नहीं, बल्कि धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा समस्त नारी जाति को दिया गया एक ‘श्राप’ है।
प्रेमानंद जी महाराज ने कथा सुनाते हुए बताया कि महाभारत (Mahabharat) का विनाशकारी युद्ध समाप्त हो चुका था। पांडव विजय प्राप्त कर चुके थे, लेकिन अपने परिजनों को खोने का दुख गहरा था। जब महाराज युधिष्ठिर युद्ध में मारे गए अपने परिवार के लोगों का तर्पण (पिंडदान) कर रहे थे, तब एक ऐसी घटना घटी जिसने उन्हें विचलित कर दिया।
माता कुंती ने खोला वर्षों पुराना राज
महाराज जी बताते हैं कि जब युधिष्ठिर तर्पण कर रहे थे, तब माता कुंती ने उनसे कहा, “बेटा, कर्ण का भी तर्पण कर देना।” यह सुनकर युधिष्ठिर चौंक गए। उन्होंने आश्चर्यचकित होकर पूछा, “माता! आप मुझे शत्रु का तर्पण करने का आदेश क्यों दे रही हैं? कर्ण तो कौरवों का सेनापति था और हमारा परम शत्रु।”
तब कुंती ने भारी मन से वह सत्य उजागर किया जिसे उन्होंने जीवन भर छिपा कर रखा था। कुंती बोलीं, “नहीं पुत्र, वह शत्रु नहीं, तुम्हारा सगा बड़ा भाई था।”
युधिष्ठिर का क्रोध और पश्चाताप
माता कुंती के मुख से यह सत्य सुनकर धर्मराज युधिष्ठिर सन्न रह गए। उनका हृदय ग्लानि और दुख से भर गया। प्रेमानंद जी ने बताया कि युधिष्ठिर ने अपनी माता से कहा, “सत्य? माँ, अगर आपने यह बात उस समय बता दी होती जब महाभारत शुरू हुआ था, तो मैं युद्ध नहीं करता। मैं कर्ण के पैर छू लेता। और जब मैं कर्ण के पैर छूता, तो युद्ध वहीं समाप्त हो जाता। इतना बड़ा नरसंहार रुक जाता।”
और दे दिया माताओं-बहनों को श्राप
इस सत्य के छिपने के कारण हुए भारी विनाश से आहत होकर युधिष्ठिर ने उसी क्षण समस्त नारी जाति को एक श्राप दे दिया। प्रेमानंद जी महाराज ने युधिष्ठिर के शब्दों को दोहराते हुए कहा, “आज मैं श्राप देता हूं कि कोई भी माता-बहनें अपनी गुप्त बात बहुत दिन तक अपने हृदय में नहीं रख पाएंगी। एक न एक दिन उन्हें वो बात बोलनी ही पड़ेगी।”




