Sugar Prices: देश में त्योहारों का सीजन शुरू होते ही मीठा खाने का खर्च बढ़ सकता है। बाजार में चीनी की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। चीनी मिलों के संगठन इस्मा (ISMA) ने इस बढ़ती कीमतों पर अपनी रिपोर्ट दी है। संगठन का कहना है कि मांग बढ़ने की उम्मीद में लोग पहले से ही ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं, जिसका असर कीमतों पर दिख रहा है। हालांकि, मिलों का मानना है कि यह बढ़त केवल कुछ समय के लिए है।
क्या चीनी के दाम बढ़ने के पीछे केवल त्यौहार ही कारण हैं?
बाजार के जानकारों का कहना है कि केवल मांग बढ़ना ही एकमात्र वजह नहीं है। इस्मा ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में कीमतें और बढ़ने के डर से थोक खरीदार बड़े पैमाने पर स्टॉक जमा कर रहे हैं। इस तरह की खरीदारी से बाजार में दबाव बना है। सरकार की ओर से हर महीने चीनी का कोटा तय किया जाता है, फिर भी भाव में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
- अगस्त के महीने में चीनी की मांग पिछले महीनों के मुकाबले काफी बढ़ गई है।
- थोक व्यापारी और स्टॉक रखने वाले लोग ऊंची कीमतों की आशंका में ज्यादा माल खरीद रहे हैं।
- इस्मा के अनुसार, मिलों के पास पर्याप्त स्टॉक है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।
- सरकार द्वारा तय किए गए मासिक बिक्री कोटे का पालन सभी मिलें कर रही हैं।
आम जनता की जेब पर इसका क्या असर पड़ेगा?
चीनी की कीमतों में हो रही इस हलचल का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर पड़ सकता है। रक्षाबंधन और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य पकवानों में चीनी का इस्तेमाल बढ़ जाता है। अगर थोक कीमतों में इसी तरह तेजी जारी रही, तो खुदरा बाजार में भी दाम बढ़ना तय है। इस्मा ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में जब आपूर्ति सामान्य होगी, तब कीमतों में स्थिरता आ सकती है।
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