Rajasthan Weather Update: राजस्थान में फिर सक्रिय हुआ मानसून, 20 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी

Rajasthan Weather Update: राजस्थान में मानसून फिर से एक्टिव हो गया है। 26 अगस्त तक जयपुर, भरतपुर और कोटा संभाग में भारी बारिश की संभावना है, जबकि 20 शहरों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।

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Rajasthan Weather Update: राजस्थान में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। सावन के आखिरी सोमवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बादल जमकर बरसे, जिससे मौसम सुहाना हो गया है। मौसम विभाग ने ताजा अनुमान जारी करते हुए अगले 24 घंटों के भीतर राज्य के 20 शहरों में येलो अलर्ट जारी किया है। आने वाले 26 अगस्त तक पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान के इलाकों में भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है।

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3 संभागों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, वर्तमान में उत्तर ओड़िशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ ही मानसून की ट्रफ लाइन भी गुजर रही है, जिसका सीधा असर राजस्थान के मौसम पर पड़ रहा है। इस सिस्टम की वजह से अगले दो से तीन दिनों तक भरतपुर, कोटा और जयपुर संभाग में मूसलाधार बारिश होने के आसार हैं। वहीं उदयपुर और अजमेर संभाग में भी हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षा दर्ज की जा सकती है।

बारिश के ताजा आंकड़े

  • डीग जिले के सीकरी में सबसे अधिक 4 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई।
  • खैरथल-तिजारा के हरसौली में 3.42 इंच और कोटकासिम में 3.14 इंच पानी बरसा।
  • अलवर के मालाखेड़ा में 3.11 इंच और गोविंदगढ़ में 3.03 इंच बारिश हुई।
  • जयपुर शहर में भी 1.45 इंच के करीब बारिश दर्ज की गई है।
  • अलवर के सिलीसेढ बांध का जलस्तर बढ़ गया है और जिले के 12 बांधों में पानी की आवक हुई है।

पश्चिमी राजस्थान में बारिश पर ब्रेक

जहां पूर्वी राजस्थान बारिश से सराबोर है, वहीं पश्चिमी राजस्थान में स्थिति थोड़ी अलग रहने वाली है। बीकानेर और जोधपुर संभाग में मानसून की गतिविधियां फिलहाल सुस्त पड़ सकती हैं। इन इलाकों में आने वाले एक हफ्ते तक तेज बारिश की संभावना काफी कम है। सीमावर्ती जिलों में गर्मी का असर बना रहेगा और वहां का पारा 36 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

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बारिश से खरीफ फसलों को फायदा

कृषि जानकारों का मानना है कि इस समय हो रही बारिश बाजरा, मक्का, ज्वार और ग्वार जैसी फसलों के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। हालांकि, कपास की खेती करने वाले किसानों को थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है।

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