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Ananta Chaturdashi 2024: अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए करें इस विधि से पूजा

Ananta Chaturdashi 2024: अनंत चतुर्दशी 2024 सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है। भगवान विष्णु, जिन्हें जगत के पालनहार के रूप में पूजा जाता है, इस दिन अपने भक्तों पर अपार कृपा बरसाते हैं।

Bharti Sharma
Written by: Bharti Sharma - Sub Editor
3 Min Read

Ananta Chaturdashi 2024: अनंत चतुर्दशी 2024 सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है। भगवान विष्णु, जिन्हें जगत के पालनहार के रूप में पूजा जाता है, इस दिन अपने भक्तों पर अपार कृपा बरसाते हैं।

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Ananta Chaturdashi: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली अनंत चतुर्दशी, गणेश विसर्जन के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा का प्रमुख अवसर है। अनंत चतुर्दशी पंचांग के अनुसार 17 सितंबर को मनाई जाएगी। इसे अनन्त चौदस भी कहते है।

भगवान विष्णु की पूजा विधि | Bhagwan Vishnu Puja Vidhi

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आइए, जानते हैं इस दिन पूजा की सही विधि:-

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  • इस दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को साफ-सुथरा करके वहां भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर रखें।
  • कलश स्थापना एवं पूजन सामग्री :-पूजा के लिए कलश स्थापना करें और उसमें अष्टदल कमल रखें।
  • भगवान की प्रतिमा पर केसर, कुमकुम, हल्दी, फूल, अक्षत, फल और भोग अर्पित करें।

रक्षा सूत्र की विधि

  • एक कच्ची डोरी लेकर उसमें चौदह गांठ लगाएं।
  • इस रक्षा सूत्र को भगवान श्री हरि को अर्पित करते समय “ऊँ अनंताय नमः” मंत्र का जाप करें।
  • फिर इसे अपनी कलाई पर बांध लें। इसे धारण करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

विशेष मंत्रों का जाप

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इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अवश्य करें।
पूजा के उपरांत आटे की रोटियां या पूड़ी बनाकर भगवान को भोग लगाएं और प्रसाद के रूप में बांटें।

अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व | Ananta Chaturdashi Importance

अनंत चतुर्दशी के दिन साधक उपवास रखते हैं और पूजा के दौरान बांधा गया पवित्र धागा भगवान विष्णु को अर्पित करते हैं। इस धागे में चौदह गांठें लगाई जाती हैं, जो भगवान विष्णु के अनंत रूपों का प्रतीक हैं। इसे कलाई पर बांधने से भगवान विष्णु स्वयं अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा और उपवास करने से साधक को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।

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इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। उपयोगकर्ता इसे अपने विवेक से उपयोग करें।

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भारती शर्मा पिछले कुछ सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। अपने कार्य क्षेत्र रहते हुए उन्होंने धर्म-कर्म, पंचांग, ज्योतिष, राशिफल, वास्तु शास्त्र, हस्तरेखा व समुद्र शास्त्र जैसे विषयों पर लेखन किया हैं। इसके अलावा उनको लोकल और ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी अनुभव हैं। फिलहाल भारती शर्मा 89.6 एफएम सीकर में आरजे की पद संभालते हुए सीकर अपडेट शो का संचालन करती हैं और बतौर ज्योतिष शास्त्र लेखन कर रही हैं।
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