Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस बार 15 फरवरी को मनाया जाएगा, जब भक्तों की आस्था और भक्ति का उमंग देखने को मिलेगा। यह पर्व भगवान शिव को समर्पित है और इसे शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना में लगे रहते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है।
शिवरात्रि पर भक्तों में आस्था
हर साल महाशिवरात्रि पर भक्तों में विशेष उमंग और आस्था का माहौल रहता है। इस दिन लोग भगवान शिव की आराधना में जुट जाते हैं। दिल्ली से लेकर कश्मीर तक मंदिरों में विशेष तैयारियां की जाती हैं। भक्त शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाकर ‘ऊं नमः शिवाय’ का जप करते हैं। इस पर्व पर भक्तों की शिवभक्ति देखने लायक होती है।
महाशिवरात्रि के शुभ मुहूर्त: दिनभर रहेगी भक्ति की धूम
इस बार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक दिनभर के कई विशेष मुहूर्त में किया जा सकता है। पहला मुहूर्त सुबह 8:24 से 9:48 तक रहेगा। इसके बाद, दूसरा मुहूर्त 9:48 से 11:11 तक है। सबसे उत्तम अमृत मुहूर्त 11:11 से 12:35 तक रहेगा। शाम को पूजा करने वालों के लिए 6:11 से 7:47 तक का समय शुभ है।
चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व
इस महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का भी विशेष महत्व है। पहला प्रहर 15 फरवरी की शाम 6:37 से शुरू होगा, दूसरा प्रहर रात 9:45 से शुरू होगा। तीसरा प्रहर आधी रात के बाद 12:53 से शुरू होगा और चौथा प्रहर 16 फरवरी को सुबह 4 बजे से होगा। इन चार प्रहरों में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
जलाभिषेक के लिए सामग्री और विधि
महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए शुद्ध जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र जैसी सामग्री का उपयोग होता है। भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहनते हैं। तांबे या चांदी के पात्र में जल लेकर शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है। ‘ऊं नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए बेलपत्र और धतूरा अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इस विधि से किया गया जलाभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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