Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि: शिव-पार्वती के दिव्य मिलन का पर्व, जानें शिव-पार्वती की अनोखी प्रेम कहानी

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व हर साल शिवभक्तों के लिए खास महत्व रखता है। इस दिन मंदिरों में दीपों की जगमगाहट और "ॐ नमः शिवाय" के जाप की गूंज के बीच भक्त पूरे जोश से भगवान शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। यह शिव और पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक है।

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महाशिवरात्रि 2026: महाशिवरात्रि का पावन पर्व कल पूरे राजस्थान में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। प्रदेश के शिव मंदिरों में विशेष सजावट की जा रही है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। जयपुर, सीकर, अजमेर और शेखावाटी क्षेत्र सहित कई जगहों पर मंदिरों में भजन-कीर्तन, जागरण और चार प्रहर की विशेष पूजा का आयोजन होगा।

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महाशिवरात्रि का पर्व हर साल शिवभक्तों के लिए खास महत्व रखता है। इस दिन मंदिरों में दीपों की जगमगाहट और “ॐ नमः शिवाय” के जाप की गूंज के बीच भक्त पूरे जोश से भगवान शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। यह सिर्फ एक साधारण उत्सव नहीं, बल्कि शिव और पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक है। इस अवसर पर भक्त शिव-पार्वती के प्रेम और त्याग की कहानी से प्रेरित होकर रात भर जागरण करते हैं।

शिव-पार्वती का अनोखा मिलन

महाशिवरात्रि की पवित्र रात शिव और पार्वती के विवाह की कहानी को समर्पित है। महान तपस्वी शिव, जिन्होंने अपनी पत्नी सती के गम में समाज से दूरी बना ली थी, पार्वती के प्रेम और तपस्या से पुनर्जीवित हुए। हिमालय की राजकुमारी पार्वती ने अपने वैभव को छोड़कर कठोर तप किया और अपने सच्चे प्रेम और दृढ़ संकल्प से शिव को प्रसन्न किया।

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पार्वती की कठिन तपस्या

पार्वती ने शिव को पाने के लिए कठिन साधना की। उन्होंने अपनी भक्ति में अन्न-जल का त्याग कर दिया और बर्फीले पहाड़ों में साधना की। शिव ने पार्वती की परीक्षा लेने के लिए उनके सामने एक ऋषि का रूप धारण कर प्रकट हुए। पार्वती के अडिग प्रेम और आराधना ने शिव को प्रभावित किया, और अंततः वे उनके प्रेम को स्वीकार करने के लिए बाध्य हो गए।

शिव का संकल्प और पार्वती की भक्ति

शिव, जो पहले अपनी पीड़ा में खोए थे, पार्वती के प्रेम से बाहर आए। यह मिलन सिर्फ एक व्यक्तिगत प्रेम कहानी नहीं, बल्कि ब्रह्मांड में संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। पार्वती की अटूट श्रद्धा और शिव के संकल्प ने एक ऐसी दिव्य प्रेम कथा को जन्म दिया, जो आज भी लोगों को प्रेरणा देती है।

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महाशिवरात्रि न केवल शिव-पार्वती के मिलन का पर्व है, बल्कि यह आत्म-साक्षात्कार और आंतरिक शांति की दिशा में एक कदम है। यह हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम और भक्ति किस प्रकार की अडिगता की मांग करती है। इस दिन हमें याद दिलाता है कि प्रेम और तपस्या एक-दूसरे के पूरक हैं और जीवन में सच्ची सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

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