Sikar Bolta Balaji Temple: सीकर में एक भव्य मंदिर का नवनिर्माण किया जा रहा है। प्राचीन बोलता बालाजी मंदिर का नवनिर्माण का शिलान्यास हो चुका है लेकिन क्या आपको बोलता बालाजी मंदिर का इतिहास पता है?
शनिवार को सीकर शहर के माधव सागर तालाब के तट पर स्थित प्राचीन बोलता बालाजी मंदिर का नवनिर्माण का शिलान्यास किया गया। इस बेहद प्राचीन मंदिर का निर्माण राम मंदिर अयोध्या की तर्ज पर किया जाना है। इसको लेकर पहले से ही योजना बनाई जा चुकी है। अब शिलान्यास के बाद आगे का काम भी तेजी से किया जाएगा।
बोलता बालाजी मंदिर लाल पत्थरों से बनेगा
जानकारी के मुताबिक, बोलता बालाजी मंदिर सीकर का निर्माण लाल पत्थरों से किया जाएगा। इस मंदिर को तीन भागों में गैलरी, हॉल और गर्भगृह बनाया जाना है। हर भाग का कार्य बारी-बारी किया जाएगा। ये मंदिर काफी भव्य बनाया जाएगा। इसलिए लंबा समय भी लग सकता है।
बोलता बालाजी मंदिर का इतिहास क्या है?
मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय लोगों की जानकारी के मुताबिक, आज से करीब 95 साल पहले माधव सागर तालाब की खुदाई चल रही थी। उसी दौरान बोलता बालाजी की मूर्ति मिली थी। बताया जाता है कि इस इलाके में अकाल के वक्त राव राजा ने आमजन को काम देने के लिए माधव सागर तालाब की खुदाई करवाई थी।
बोलता बालाजी मंदिर का रहस्य
मान्यता है कि जब खुदाई के वक्त ये मूर्ति मिली थई तब इस मूर्ति से आवाज आती थी, इसलिए इसका नाम बोलता बालाजी पड़ा। तब से ये मंदिर भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां पर काफी दूर से लोग पूजा करने आते हैं।
जान लें, राव राजा माधव सिंह ने यहां छोटा सा मंदिर बनाकर खुदाई में निकली मूर्ति की स्थापना करवा दी थी। साथ ही मंदिर में सेवा की जिम्मेदारी भी विलास तिवाडी महाराज को सौंपी गई थी।
आज के मंदिर शिलान्यास समारोह में रेवासा धाम के अग्रपीठाधीश्वर श्री श्री 1008 संत राजेंद्र दास जी देवाचार्य के अलावा अन्य धार्मिक लोग के साथ-साथ राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाडी, सीकर के वर्तमान सांसद सांसद अमराराम आदि मौजूद थे।
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