Diwali 2024 Puja Rules: दिवाली पर मां लक्ष्मी जी के साथ ना करें इस देवता की पूजा, माना जाता है अशुभ! जानें ये जरूरी बातें

Diwali 2024 Puja Rules: दिवाली, हिंदू धर्म का सबसे प्रमुख त्योहार है, जिसे समृद्धि, खुशी और उजाले का प्रतीक माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा मुख्य रूप से की जाती है, क्योंकि वे धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी हैं।

Bharti Sharma
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Bharti Sharma - Sub Editor
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Diwali 2024 Puja Rules: दिवाली, हिंदू धर्म का सबसे प्रमुख त्योहार है, जिसे समृद्धि, खुशी और उजाले का प्रतीक माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा मुख्य रूप से की जाती है, क्योंकि वे धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी हैं। लेकिन एक सवाल जो कई लोगों के मन में आता है, वह यह है कि दिवाली के दिन भगवान विष्णु की पूजा क्यों नहीं की जाती, जबकि वे लक्ष्मी जी के पति हैं। इस सवाल के पीछे धार्मिक, पौराणिक और सांस्कृतिक पहलू जुड़े हैं।

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लक्ष्मी जी की दिवाली पर प्रधानता

दिवाली के दिन लक्ष्मी जी की पूजा का प्रमुख कारण यह है कि यह दिन विशेष रूप से उनकी कृपा प्राप्ति के लिए समर्पित होता है। दिवाली को “लक्ष्मी पूजन” के नाम से भी जाना जाता है, जो संकेत देता है कि यह दिन उनकी आराधना के लिए है। पुराणों के अनुसार, इस दिन लक्ष्मी जी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, और तभी से इस दिन उनकी पूजा की परंपरा चली आ रही है।

विष्णु जी की भूमिका और उनका न होना

भगवान विष्णु को सृष्टि के पालक के रूप में जाना जाता है और वे संसार की रक्षा करते हैं। हालांकि, दिवाली के दिन उनकी पूजा का अभाव होने का मुख्य कारण यह है कि इस दिन की पूरी महत्ता लक्ष्मी जी को समर्पित है। इस समय भगवान विष्णु, शिव की सेवा में होते हैं, क्योंकि यह काल “विश्राम काल” होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विष्णु जी चार महीने के चातुर्मास में योगनिद्रा में होते हैं, जो श्रावण शुक्ल एकादशी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक रहता है। दिवाली इस अवधि के दौरान आती है, इसलिए उनकी विशेष पूजा इस समय नहीं होती।

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विष्णु जी की पूजा का समय

भगवान विष्णु की पूजा का विशेष समय कार्तिक शुक्ल एकादशी, जिसे “प्रबोधिनी एकादशी” या “देवोत्थान एकादशी” कहते हैं, होता है। इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और तभी से विवाह, उत्सव और मांगलिक कार्य पुनः शुरू होते हैं। लक्ष्मी जी की पूजा दिवाली पर इसलिए होती है क्योंकि यह समय धन-धान्य और समृद्धि की कामना का होता है।

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सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण

दिवाली पर लक्ष्मी जी की पूजा को सांस्कृतिक दृष्टिकोण से देखें तो यह व्यापारियों और गृहस्थों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दिन नए व्यावसायिक खाते शुरू किए जाते हैं और धन की देवी की कृपा से समृद्धि की कामना की जाती है। धार्मिक दृष्टिकोण से भी यह दिन विशेष है क्योंकि इसे तामसिक प्रवृत्तियों से दूर रहकर सात्विकता को अपनाने का समय माना गया है, जिसमें भगवान विष्णु की भूमिका के बजाय लक्ष्मी जी का पूजन अधिक प्रधान होता है।

दिवाली के दिन लक्ष्मी जी की पूजा का मुख्य कारण उनकी समृद्धि और ऐश्वर्य के प्रतीक के रूप में महत्ता है। भगवान विष्णु का दिवाली पर पूजा न होना धार्मिक मान्यताओं और कालचक्र से जुड़ा हुआ है। दिवाली लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त करने का समय है, जबकि भगवान विष्णु की पूजा चातुर्मास समाप्त होने के बाद की जाती है।

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भारती शर्मा पिछले कुछ सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। अपने कार्य क्षेत्र रहते हुए उन्होंने धर्म-कर्म, पंचांग, ज्योतिष, राशिफल, वास्तु शास्त्र, हस्तरेखा व समुद्र शास्त्र जैसे विषयों पर लेखन किया हैं। इसके अलावा उनको लोकल और ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी अनुभव हैं। फिलहाल भारती शर्मा 89.6 एफएम सीकर में आरजे की पद संभालते हुए सीकर अपडेट शो का संचालन करती हैं और बतौर ज्योतिष शास्त्र लेखन कर रही हैं।
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