Happy Hypoxia in Hindi: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) को हाल ही में हैप्पी हाइपोक्सिया नामक बीमारी ने जकड़ लिया, तब से इस बीमारी को लेकर काफी चर्चा हो रही है। हालांकि, हैप्पी हाइपोक्सिया कोई नया नाम नहीं है। कोरोना (Coronavirus) वायरस की लहर के बाद लोगों में हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण देखने को मिले थे। लेकिन, बिना कोरोना के अब यह बीमारी सामने आई है तो सवाल है कि यह बीमारी किस लोगों अपना शिकार बनाती है। हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण और उपचार क्या है। तो चलिए जानते हैं क्या है हैप्पी हाइपोक्सिया।
क्या है हैप्पी हाइपोक्सिया? (What is happy hypoxia?)
हैप्पी हाइपोक्सिया खून में ऑक्सीजन की कमी से जुड़ी बीमारी है। यानी इस बीमारी के होने पर मरीज में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। एक स्वस्थ मनुष्य के शरीर में ऑक्सीजन सेच्युरेशन 95 प्रतिशत होता है। वहीं, अगर किसी भी व्यक्ति के शरीर में यह सेचुरेशन प्वाइंट 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, तो यह बीमारी हो सकती है। वहीं, हैप्पी हाइपोक्सिया की वजह से गुर्दे, मस्तिष्क, दिल, फेफड़े और शरीर के दूसरे अंग भी काम करना बंद कर सकते हैं।
हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण? (Happy Hypoxia symptoms in Hindi)
- सांस लेने में तकलीफ
- घबराहट
- चक्कर आना
- कई बार आंखों के आगे अंधेरा छाना
- खांसी
- गले में खराश
- बुखार और सिर दर्द
इनके अलावा हैप्पी हाइपोक्सिया के और भी लक्षण हो सकते हैंं। जैसे होंठों का नीला पड़ जाना, स्किन के रंग में बदलाव, बिना किसी शारीरिक मेहनत के ज्यादा पसीना आना। हालांकि, कुछ मामलों में बिना लक्षण के भी ये बीमारी हो जाती है।
हैप्पी हाइपोक्सिया से बचाव के तरीके (Happy Hypoxia Treatment in Hindi)
डॉक्टर के अनुसार, सबसे पहले आपना ऑक्सीजन सेचुरेशन जांच करें। अगर वो 94% से कम हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ऑक्सीजन लेवल 90% से कम होने पर मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ती है और मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी जाती है।अच्छा होगा कि आप समय-समय पर ऑक्सीमीटर से इसकी जांच करते रहें।
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