Kuldhara Village Story: कहानी कुलधरा गांव की, जहां दिन में भी जाने से डरते हैं लोग, क्यों कहते हैं भूतिया गांव?

Kuldhara Village Story in Hindi: यह कहानी राजस्थान के जैसलमेर के पास स्थित कुलधरा (kuldhara haunted village) गांव की है, जहां कभी पालीवाल ब्राह्मण निवास करते थे। कहते हैं कि इस गांव में एक अत्यंत सुंदर लड़की की शादी होने वाली थी। उसकी सुंदरता की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी।

Bharti Sharma
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Bharti Sharma - Sub Editor
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Kuldhara Village Story in Hindi: यह कहानी राजस्थान के जैसलमेर के पास स्थित कुलधरा (kuldhara haunted village) गांव की है, जहां कभी पालीवाल ब्राह्मण निवास करते थे। कहते हैं कि इस गांव में एक अत्यंत सुंदर लड़की की शादी होने वाली थी। उसकी सुंदरता की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी।

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जैसलमेर रियासत के दीवान, सालिम सिंह, जो अपनी क्रूरता और अत्याचार के लिए जाना जाता था, ने उस लड़की को देखा और उस पर मोहित हो गया। सालिम सिंह ने उस लड़की से शादी करने का निर्णय कर लिया और गांववालों पर दबाव डालने लगा।

स्थानीय मान्यताओं और कथाओं के अनुसार, सालिम सिंह का स्वभाव अत्याचारी था, और उसके जुल्म की कहानियाँ दूर-दूर तक फैली हुई थीं। लेकिन कुलधरा के लोगों ने अपने सिद्धांतों और मान-सम्मान के कारण सालिम सिंह के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

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सालिम सिंह ने गांववालों को सोचने के लिए कुछ दिनों का समय दिया, लेकिन उन्हें अंदेशा था कि अगर उन्होंने उसकी बात नहीं मानी, तो वह उनके गांव में क़त्लेआम कर देगा। अपने सम्मान और बेटी की सुरक्षा के लिए, गांव के बुजुर्गों ने एक चौपाल में पंचायत बुलाई और हमेशा के लिए गांव छोड़ने का फैसला किया।

रात के सन्नाटे में, पूरे गांव के लोग अपने सामान, मवेशी, अनाज और कपड़े लेकर अपने घरों को छोड़कर चले गए और फिर कभी वापस नहीं आए। आज भी कुलधरा गांव के खंडहरों में उन समृद्ध दिनों के अवशेष मिलते हैं।

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पत्थर के मकानों में चूल्हे, बैठने की जगहें और घड़े रखने की जगहें देखने को मिलती हैं, जिससे लगता है जैसे लोग अभी-अभी यहां से गए हों। जैसलमेर में सालिम सिंह की हवेली आज भी खड़ी है, लेकिन उसे देखने कोई नहीं जाता। कुलधरा के खंडहरों में आज भी सन्नाटे में सरसराती हुई हवा की आवाज़ माहौल को और भी उदास बना देती है।

स्थानीय लोग बताते हैं कि रात के समय खंडहरों में कदमों की आहट सुनाई देती है और यह मान्यता है कि कुलधरा के लोगों की आत्माएं आज भी वहां भटकती हैं।

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यह कहानी न केवल पालीवाल ब्राह्मणों के संघर्ष और साहस को दर्शाती है, बल्कि उनके संस्कृति और मान-सम्मान की रक्षा के लिए किए गए बलिदान को भी उजागर करती है।

नोट: इस आलेख में मौजूद बातें, इंटरनेट पर दर्ज विभिन्न स्रोतों से ​ली गई हैं, एफएम सीकर इन सब बातों की जिम्मेदारी नहीं लेता है।

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भारती शर्मा पिछले कुछ सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। अपने कार्य क्षेत्र रहते हुए उन्होंने धर्म-कर्म, पंचांग, ज्योतिष, राशिफल, वास्तु शास्त्र, हस्तरेखा व समुद्र शास्त्र जैसे विषयों पर लेखन किया हैं। इसके अलावा उनको लोकल और ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी अनुभव हैं। फिलहाल भारती शर्मा 89.6 एफएम सीकर में आरजे की पद संभालते हुए सीकर अपडेट शो का संचालन करती हैं और बतौर ज्योतिष शास्त्र लेखन कर रही हैं।
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