Patanjali misleading ads case: पतंजलि देश की नामी कंपनियों मे से एक है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से इसे लेकर काफी विवाद हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने मंगलवार को पतंजलि मामले में फिर से बाबा रामदेव (Baba Ramdev) और बालकृष्ण आचार्य को व्यक्तिगत समन जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रामदेव के स्वामित्व वाली पतंजलि आयुर्वेद और उस कंपनी के निदेशक (Managing Director) आचार्य बालकृष्ण को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने और स्वास्थ्य उपचार के लिए भ्रामक विज्ञापन जारी करने के लिए उनके खिलाफ शुरू की गई अवमानना कार्यवाही का जवाब देने का निर्देश दिया।
फिलहाल इसकी सुनवाई के लिये कोई तारीख तय नहीं की गई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि कंपनी के वकील ने पूर्व मे आश्वावाशन दिया था कि इस तरह के विज्ञापनों को रोक दिया जायेगा, परंतु इसके बावजूद पतंजलि ने भ्रामक विज्ञापन जारी रखे। मामले में सुनवाई टाल दी गई है, फिलहाल कोई तारीख तय नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि कंपनी के वकील के पिछले दिये गये लगातार आश्वासनों के बावजूद पतंजलि ने भ्रामक विज्ञापन जारी रखे हैं।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने प्रथम दृष्टया रामदेव और बालकृष्ण को ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 की धारा 3 और 4 का उल्लंघन करते हुए पाया गया था, जिसके तहत पूर्व मे काफी बार कोर्ट द्वारा निर्देश जारी किये गये थे परन्तु उन पर पतंजलि द्वारा अवहेलना की गई थी। साथ जस्टिस कोहली रामदेव और बालकृष्ण से अपना जवाब सामने रखने के निर्देश दिए हैं।
27 फरवरी को, सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक स्वास्थ्य उपचार विज्ञापनों के लिए बाबा रामदेव और बालकृष्ण आचार्य को अवमानना नोटिस जारी किया था, जिसमें पतंजलि को हृदय रोगों और कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों के ईलाज के भ्रामक दावों वाले उत्पादों को बढ़ावा देने से रोक दिया गया था। अदालत ने पतंजलि और उसके अधिकारियों को किसी भी मीडिया में किसी भी चिकित्सा प्रणाली की आलोचना करने से भी मना किया।
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